नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद छात्र राजनीति का तापमान चढ़ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने चुनाव परिणामों और छात्र राजनीति के गिरते स्तर को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज छात्र संघ चुनावों में केवल और केवल “धनबल” (मसल और मनी पावर) का राज चल रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में चुनाव प्रचार करने वाले छात्र नेता आम गाड़ियों से नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये मूल्य की रोल्स रॉयस (Rolls Royce), ऑडी (Audi) और बीएमडब्ल्यू (BMW) जैसी लक्जरी कारों में घूमते हैं।
धनबल और बाहुबल के साये में छात्र राजनीति
अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत करते हुए डूसू चुनावों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “चुनावों में अब केवल पैसा काम करता है और कुछ नहीं। जो लोग दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रचार करने आते हैं, वे करोड़ों की रोल्स रॉयस, ऑडी और बीएमडब्ल्यू जैसी बड़ी-बड़ी गाड़ियों से आते हैं। जब छात्र राजनीति में इतना पैसा बहेगा, तो सामान्य पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए निष्पक्ष चुनाव लड़ना असंभव हो जाता है।”
हाल ही में घोषित हुए डूसू चुनाव परिणामों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत हासिल की है। इसमें अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव का पद शामिल है। वहीं, कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा और वह किसी भी केंद्रीय पद को हासिल करने में नाकाम रही।
डूसू चुनाव परिणाम 2026 की स्थिति
- अध्यक्ष पद: ABVP के यश डाबास ने 24,576 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।
- सचिव पद: ABVP की रिया छावड़ी 21,650 वोट पाकर विजयी रहीं।
- संयुक्त सचिव पद: ABVP के लक्ष्य राज सिंह को 16,641 वोट मिले और उन्होंने जीत हासिल की।
- उपाध्यक्ष पद: निर्दलीय प्रत्याशी (NSUI बागी) दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोटों के भारी जनादेश से जीत दर्ज की।
विश्वविद्यालयों में वैचारिक ध्रुवीकरण और दमन का आरोप
CJP संयोजक अभिजीत दीपके ने केवल डूसू चुनाव पर ही हमला नहीं बोला, बल्कि उन्होंने देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा विचारधारा-विशेष के लोगों को शीर्ष पदों पर बैठाने का आरोप लगाया था।
वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV) की कुलपति कुमुद शर्मा का उदाहरण देते हुए दीपके ने आरोप लगाया कि, “जब से संघ पृष्ठभूमि की कुलपति नियुक्त हुई हैं, तब से 50 से अधिक छात्रों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि जब दलित, आदिवासी या अन्य हाशिए पर पड़े वर्गों के छात्र अपने अधिकारों के लिए विरोध-प्रदर्शन करते हैं, तो उन पर पुलिस केस ठोक दिया जाता है। इसके विपरीत, जब सत्ताधारी विचारधारा से जुड़े संगठन गेट पर ताले जड़ते हैं या उपद्रव करते हैं, तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने इसे देश के शिक्षण संस्थानों को आरएसएस की शाखा बनाने का रोडमैप करार दिया।
परीक्षा प्रणाली पर से उठता भरोसा और MPSC का मुद्दा
दीपके ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के अभ्यर्थियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि युवाओं का देश की परीक्षा प्रणालियों से विश्वास पूरी तरह उठ चुका है। MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहे अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए दीपके ने कहा कि जब तक भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारी पद पर बने रहेंगे, तब तक परीक्षाओं में पारदर्शिता संभव नहीं है।
उन्होंने घोषणा की कि CJP जल्द ही MPSC अभ्यर्थियों के साथ मिलकर एक बड़ा डिजिटल अभियान ‘भीमनवार राजीनामा द्या’ (भीमनवार इस्तीफा दो) शुरू करेगी, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों और सत्ता पक्ष के गठजोड़ का खुलासा किया जाएगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव हर साल देश भर में चर्चा का विषय बनते हैं, लेकिन गाड़ियों, पोस्टरों और पैसों की बर्बादी पर लगातार उठते सवाल यह दर्शाते हैं कि देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति अब आम छात्रों की पहुंच से दूर होती जा रही है। CJP संयोजक के इन आरोपों ने एक बार फिर छात्र राजनीति में कड़े चुनाव सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
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