हवाई सफर को आमतौर पर सबसे आरामदायक और सुरक्षित माना जाता है, लेकिन जब बीच आसमान में ही विमान ‘रेसलिंग रिंग’ बन जाए तो क्रू मेंबर्स के साथ-साथ बाकी यात्रियों की सांसें अटकना लाजमी है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय उड़ान के दौरान एक ऐसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। लंदन जा रही एक फ्लाइट में अचानक यात्रियों के दो गुटों के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। बीच आसमान में करीब 30,000 फीट की ऊंचाई पर चले लात-घूंसे और हाथापाई ने पूरे विमान में खलबली मचा दी। इस अप्रत्याशित घटना से न केवल पायलट और एयरहोस्टेस दहशत में आ गए, बल्कि अन्य यात्रियों के बीच भी चीख-पुकार मच गई।
आखिर क्या था पूरा मामला?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उड़ान भरने के कुछ ही घंटों बाद जब यात्री अपनी सीटों पर आराम कर रहे थे या भोजन कर रहे थे, तभी दो यात्रियों के बीच किसी मामूली बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। विवाद की शुरुआत सीट रीकलाइन करने (पीछे झुकाने) या हैंड बैग रखने की जगह को लेकर बताई जा रही है। शुरुआती बहस में सिर्फ जुबानी जंग हो रही थी, लेकिन देखते ही देखते गुस्सा इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने आपा खो दिया।
मामला इतना बढ़ गया कि एक यात्री ने दूसरे पर अचानक थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद दोनों तरफ से लात-घूंसे चलने लगे। एक-दूसरे को घूंसे मारते हुए वे गलियारे (Aisle) में गिर पड़े, जिससे विमान की गैली और आसपास की सीटों को भी नुकसान पहुंचा। इस दौरान कुछ अन्य यात्रियों ने उन्हें बीच-बचाव कर अलग करने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित यात्री किसी की सुनने को तैयार नहीं थे।
पायलट और एयरहोस्टेस की अटकीं सांसें
विमान में जारी इस हाई-वोल्टेज ड्रामे को देखकर केबिन क्रू (एयरहोस्टेस और फ्लाइट अटेंडेंट्स) के हाथ-पांव फूल गए। आमतौर पर क्रू मेंबर्स को इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन या खराब मौसम से निपटने की ट्रेनिंग दी जाती है, लेकिन यात्रियों के इस तरह हिंसक होने की स्थिति में उनके लिए माहौल को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
एयरहोस्टेस लगातार यात्रियों से शांत रहने और अपनी सीटों पर बैठने की अपील करती रहीं, लेकिन हाथापाई कर रहे लोग किसी नियम-कानून को मानने को तैयार नहीं थे। धक्का-मुक्की में एक क्रू मेंबर को भी मामूली चोट आने की खबर है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चीफ केबिन क्रू ने तुरंत कॉकपिट में पायलट-इन-कमांड को इसकी सूचना दी।
कॉकपिट में मौजूद कैप्टन और सह-पायलट के लिए यह बेहद तनावपूर्ण स्थिति थी। 30,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे एक बड़े पैसेंजर एयरक्राफ्ट में इस तरह की हिंसा से विमान के संतुलन और सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडराने लगा था। पायलट ने तुरंत केबिन में अलर्ट जारी किया और क्रू को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।
विमान में मची अफरा-तफरी और डर का माहौल
जिस समय यह पूरी घटना घटी, उस वक्त फ्लाइट में कई बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे भी सवार थे। अचानक हुए इस हुड़दंग और हिंसा को देखकर बच्चे डर के मारे रोने लगे, वहीं कई बुजुर्ग यात्रियों की घबराहट के कारण तबीयत बिगड़ने लगी। यात्रियों को डर सता रहा था कि अगर हाथापाई के दौरान विमान की खिड़की या किसी आपातकालीन दरवाजे को कोई नुकसान पहुंच गया, तो एक बड़ा हादसा हो सकता है।
पूरे केबिन में अफरा-तफरी का माहौल था। कुछ साहसी यात्रियों ने क्रू मेंबर्स के साथ मिलकर किसी तरह हिंसक यात्रियों को काबू में करने की कोशिश की और भारी मशक्कत के बाद उन्हें उनकी सीटों पर बांधकर (Restrain करके) बिठाया गया।
आपातकालीन लैंडिंग और पुलिस की कार्रवाई
विमान में उत्पन्न हुए इस गंभीर सुरक्षा जोखिम को देखते हुए पायलट ने रूट के नजदीकी एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया और ‘मेडिकल व सिक्योरिटी इमरजेंसी’ घोषित करते हुए फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग कराने की अनुमति मांगी। ATC से हरी झंडी मिलते ही विमान को निकटतम हवाई अड्डे की तरफ मोड़ दिया गया।
जैसे ही विमान ने आपातकालीन लैंडिंग की, पहले से मौजूद सुरक्षा एजेंसियों, एयरपोर्ट पुलिस और स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने तुरंत प्लेन में प्रवेश किया। उपद्रव मचाने वाले आरोपी यात्रियों को हिरासत में ले लिया गया और प्लेन से नीचे उतार दिया गया। स्थानीय पुलिस ने यात्रियों के खिलाफ सिविल एविएशन एक्ट के तहत हवाई सुरक्षा को खतरे में डालने, क्रू मेंबर्स के काम में बाधा डालने और सह-यात्रियों पर हमला करने के संगीन आरोपों में मामला दर्ज कर लिया है।
उड्डयन विशेषज्ञों की राय और नियम
हवाई यात्रा के दौरान इस प्रकार की अनियंत्रित (Unruly) हरकतों पर एविएशन एक्सपर्ट्स ने गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का मानना है कि हवा में इस तरह का व्यवहार केवल एक विवाद नहीं, बल्कि सैकड़ों मासूम जिंदगियों के साथ खिलवाड़ है।
अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के सख्त नियम हैं कि यदि कोई यात्री विमान के भीतर हिंसा, बदसलूकी या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे ‘नो-फ्लाई लिस्ट’ (No-Fly List) में डाला जा सकता है। इसका मतलब है कि ऐसे अपराधियों पर भविष्य में किसी भी एयरलाइन से यात्रा करने पर कई महीनों या सालों के लिए प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
इसके अलावा, आरोपी यात्रियों पर भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान भी है। एयरलाइंस कंपनियां भी ऐसी घटनाओं के बाद होने वाले आर्थिक नुकसान (जैसे इमरजेंसी लैंडिंग का ईंधन और एयरपोर्ट चार्ज) की भरपाई के लिए यात्रियों पर दीवानी मुकदमा दर्ज कर सकती हैं।
लंदन जा रही इस फ्लाइट की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हवाई यात्रा के दौरान संयम और अनुशासन कितना जरूरी है। क्रू मेंबर्स की सूझबूझ और पायलट के समय पर लिए गए फैसले से एक बड़ा हादसा टल गया और विमान सुरक्षित उतर सका। हालांकि, इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या फ्लाइट्स में सुरक्षा जांच और बोर्डिंग के समय यात्रियों के मानसिक व आक्रामक व्यवहार की जांच के नियमों को और कड़ा करने की जरूरत है, ताकि आसमान में कोई दोबारा प्लेन को ‘अखाड़ा’ न बना सके।
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