कानपुर मर्डर केस: बहू की ‘हार्ट अटैक’ वाली खौफनाक साजिश का पर्दाफाश

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में सामने आए चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड ने रिश्तों की मर्यादा और क्राइम थ्रिलर की कहानियों को भी पीछे छोड़ दिया। जिस घर में बहू को लक्ष्मी का रूप मानकर स्वागत किया गया था, उसी घर की बहू ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर ससुर की हत्या की साजिश रची। इस पूरे मामले को बड़े ही शातिर तरीके से “कुदरती मौत” यानी हार्ट अटैक का रूप देने की कोशिश की गई थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने इस सनसनीखेज साजिश का पर्दाफाश कर दिया।

साजिश की पृष्ठभूमि और रिश्तों में दरार

कानपुर के प्रसिद्ध दवा व्यापारी विनीत मिनोचा अपने परिवार के साथ सुखी जीवन व्यतीत कर रहे थे। परिवार में व्यापार की समृद्धि के साथ-साथ सामाजिक प्रतिष्ठा भी काफी अधिक थी। हालांकि, घर के भीतर एक अलग ही तरह का माहौल पनप रहा था। विनीत मिनोचा की बहू अपने शादीशुदा जीवन और पारिवारिक बंदिशों से खुश नहीं थी। इसी दौरान उसका झुकाव अपने एक परिचित प्रेमी की ओर बढ़ता चला गया। दोनों के बीच लगातार बातचीत और मुलाकातें होने लगीं।

जब ससुर विनीत मिनोचा को अपनी बहू के इस संदिग्ध रवैये और प्रेमी के साथ रिश्तों की भनक लगी, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। परिवार में मान-सम्मान बचाने और बहू को सही रास्ते पर लाने के लिए कई बार हिदायतें दी गईं। यही विरोध बहू की आंखों में कांटा बनकर चुभने लगा। बहू और उसके प्रेमी ने यह महसूस किया कि जब तक विनीत मिनोचा जिंदा हैं, तब तक वे दोनों खुलकर अपने रिश्ते को आगे नहीं बढ़ा सकते और न ही संपत्ति पर अपना वर्चस्व बना सकते हैं। यहीं से रची गई एक खौफनाक हत्या की साजिश।

‘हार्ट अटैक’ का खतरनाक मास्टरप्लांट

बहू और उसके प्रेमी ने अपराध की दुनिया की फिल्मों और कहानियों से सीख लेकर हत्या की एक ऐसी पटकथा तैयार की, जिससे किसी को शक न हो। उनका मुख्य मकसद यह था कि विनीत मिनोचा की जान भी चली जाए और किसी को यह अंदाजा भी न लगे कि यह एक हत्या है।

  • नशीली दवाओं का इस्तेमाल: साजिश के तहत विनीत मिनोचा को नियमित रूप से दी जाने वाली खाने-पीने की चीजों या दवाओं में धीमा विष अथवा भारी मात्रा में शामक (sedative) दवाइयां मिलाकर दी जाने लगीं, ताकि उनका शरीर कमजोर पड़ जाए।
  • हार्ट अटैक की कहानी: वारदात वाले दिन, योजना के मुताबिक विनीत मिनोचा पर जानलेवा हमला किया गया और सांस घोंटकर या जहर के प्रभाव से उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया।
  • अस्पताल और रिश्तेदारों को गुमराह करना: हत्या के तुरंत बाद बहू ने घर में रोना-धोना शुरू कर दिया और आसपास के लोगों तथा रिश्तेदारों को यह सूचना दी कि विनीत जी को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वे बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बहू ने इसे एक स्वाभाविक दिल का दौरा (Heart Attack) बताने की पूरी कोशिश की।

कैसे बिखरा साजिश का ताश का महल

शातिर बहू ने सोचा था कि शव का अंतिम संस्कार होते ही सारा मामला शांत हो जाएगा और संपत्ति भी हाथ में आ जाएगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

  1. रिश्तेदारों का संदेह: विनीत मिनोचा के शरीर पर कुछ मामूली चोट के निशान और बहू के असामान्य व्यवहार ने परिवार के अन्य सदस्यों के मन में शक पैदा कर दिया। विनीत जी को पहले से दिल की कोई गंभीर बीमारी नहीं थी, इसलिए अचानक हुई इस मौत पर सवाल उठने लगे।
  2. पुलिस की एंट्री और पोस्टमार्टम: मामला पुलिस के पास पहुंचा। पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने का निर्णय लिया। यही फैसला आरोपियों की बर्बादी की वजह बना।
  3. फॉरेंसिक रिपोर्ट से खुलासा: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया कि मौत प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि दम घुटने और जहरीले तत्वों के शरीर में मौजूद होने के संकेत मिले। शरीर पर आंतरिक चोटों के निशान भी पाए गए।

कॉल डिटेल और पुलिस की पूछताछ

सबूत मिलते ही पुलिस ने जांच की दिशा बदल दी। बहू और घर के संदिग्ध लोगों के मोबाइल फोन की सीडीआर (Call Detail Record) खंगाली गई। सीडीआर विश्लेषण से पता चला कि घटना वाली रात और उससे पहले बहू की अपने प्रेमी से लगातार घंटों बात हुई थी। वारदात के वक्त भी प्रेमी की लोकेशन घर के आसपास ही दर्ज की गई थी।

जब पुलिस ने बहू और उसके प्रेमी को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की, तो शुरू में वे पुलिस को भटकाने की कोशिश करते रहे। हालांकि, जब पुलिस ने उनके सामने फॉरेंसिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्डिंग्स रखीं, तो बहू टूट गई और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

कानपुर का यह मर्डर केस समाज में रिश्तों के गिरते स्तर और अपराध के बढ़ते ट्रेंड को उजागर करता है। खुद को कानून से ऊपर समझने वाले अपराधियों ने भले ही ‘हार्ट अटैक’ की एकदम सटीक पटकथा लिखी थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता और वैज्ञानिक जांच के आगे उनका यह खौफनाक प्लान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। आज आरोपी सलाखों के पीछे अपने गुनाहों की सजा भुगत रहे हैं।

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  • Rahul Kaushik

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