पीएम मोदी बोले- भारत पर दुनिया का भरोसा बढ़ा: देश की सेमीकंडक्टर चिप्स ग्लोबल मार्केट तक पहुंच रहीं

भारत ने वैश्विक प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती तकनीकी ताकत का उल्लेख करते हुए स्पष्ट कहा कि आज पूरी दुनिया का भरोसा भारत पर अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। भारत अब केवल अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए बैकएंड सपोर्ट या असेंबली हब नहीं रहा, बल्कि ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर चिप्स (Semiconductor Chips) अब ग्लोबल मार्केट तक पहुंच रही हैं।

डिजिटल अर्थव्यवस्था और आधुनिक तकनीक के इस दौर में सेमीकंडक्टर चिप्स की भूमिका सर्वोपरि हो चुकी है। भारत का इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) अब धरातल पर परिणाम दिखाने लगा है, और देश तेजी से एक फुल-स्टैक सेमीकंडक्टर नेशन बनने की ओर अग्रसर है।

चिप्स हैं 21वीं सदी के ‘डिजिटल हीरे’

प्रधानमंत्री ने तकनीक और ऊर्जा के वैश्विक समीकरण को रेखांकित करते हुए एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा, “बीती शताब्दी (20वीं सदी) में जहां तेल को ‘काला सोना’ माना जाता था और दुनिया की अर्थव्यवस्था तेल के कुओं से तय होती थी, वहीं 21वीं सदी में पूरी दुनिया की ताकत एक छोटी सी चिप के भीतर सिमट गई है। अगर तेल काला सोना था, तो यह चिप्स 21वीं सदी के ‘डिजिटल हीरे’ (Digital Diamonds) हैं।”

आज स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), जेट फाइटर प्लेन, डेटा सेंटर, एआई (Artificial Intelligence) सर्वर और मेडिकल इक्विपमेंट्स तक, सब कुछ सेमीकंडक्टर चिप्स पर निर्भर है। यही कारण है कि जो देश चिप विनिर्माण और डिजाइनिंग में बढ़त हासिल करेगा, वही भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करेगा।

वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भारत की भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक महामारी और भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical Tensions) के कारण पूरी दुनिया ने सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के बाधित होने के खतरों को झेला है। दुनिया के तमाम बड़े देश अब एक ऐसे भरोसेमंद और मजबूत साझेदार की तलाश में थे जो सप्लाई चेन को बिना रुके चला सके।

भारत ने इस चुनौती को अवसर में बदला:

  • भरोसेमंद लोकतांत्रिक साझेदार: भारत को दुनिया एक स्थिर, लोकतांत्रिक और पारदर्शी नीति वाले देश के रूप में देख रही है।
  • इकोसिस्टम का निर्माण: भारत सिर्फ एक-दो फैब (Fab) लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि raw material से लेकर टेस्टिंग, पैकेजिंग (ATMP/OSAT) और डिजाइनिंग तक का एक पूरा इकोसिस्टम तैयार कर रहा है।
  • प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर: सेमीकंडक्टर पार्कों में बिजली, पानी, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी की निर्बाध सुविधाएं दी जा रही हैं ताकि ग्लोबल निवेशकों को काम शुरू करने में समय न लगे।

1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और विशाल परियोजनाएं

भारत सरकार द्वारा 2021 में शुरू किए गए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत अब तक $18 बिलियन (लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक) के निवेश से 10 से अधिक प्रमुख परियोजनाओं को हरी झंडी दी जा चुकी है।

गुजरात के धोलेरा और साणंद से लेकर असम के मोरीगांव तक आधुनिक चिप विनिर्माण और असेंबली इकाइयां स्थापित हो रही हैं।

  1. वेफर फैब्रिकेशन (Wafer Fabrication): देश में कमर्शियल चिप्स के उत्पादन के लिए बड़े फैब प्लांट्स पर काम तेजी से जारी है।
  2. पैकेजिंग और टेस्टिंग (OSAT/ATMP): अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों के साथ मिलकर भारत में एडवांस्ड पैकेजिंग टेक्नोलॉजी विकसित की जा रही है।
  3. घरेलू प्रोसेसर का विकास: भारत में डिजाइन और निर्मित 32-बिट और 64-बिट स्वदेशी प्रोसेजर्स (जैसे ‘विक्रम’ सीरीज) अब भारतीय उद्योगों और रक्षा अनुप्रयोगों में इस्तेमाल हो रहे हैं।

‘डिजाइन इन इंडिया’ और युवा प्रतिभा का पराक्रम

भारत हमेशा से चिप डिजाइनिंग का पावरहाउस रहा है। दुनिया भर के सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों में से लगभग 20% वर्कफोर्स भारतीय प्रतिभाओं की है। हालांकि, पहले ये इंजीनियर विदेशी कंपनियों के लिए काम करते थे और बौद्धिक संपदा (IP) विदेशों के पास रहती थी।

अब स्थिति बदल चुकी है:

  • नोएडा, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में एडवांस्ड चिप डिजाइन सेंटर बनाए गए हैं।
  • ये भारतीय सेंटर बिलियन-ट्रांजिस्टर चिप्स डिजाइन कर रहे हैं जो आने वाले समय में AI, ऑटोमोटिव और सुपरकंप्यूटिंग को पावर देंगे।
  • सरकार ने 100 से अधिक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सेमीकंडक्टर-विशिष्ट पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जिससे हर साल हजारों कुशल वर्कफोर्स तैयार हो रही है।

1 ट्रिलियन डॉलर के ग्लोबल मार्केट में भारत की हिस्सेदारी

इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर (1000 अरब डॉलर) के आंकड़े को पार कर जाएगा। वहीं, भारत का अपना घरेलू सेमीकंडक्टर बाजार जो 2023-24 में लगभग 38-45 अरब डॉलर का था, वह 2030 तक 100 से 110 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत अपनी तीव्र गति, नीतिगत स्थिरता और बड़े स्केल के बल पर इस 1 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक बाजार में एक बड़ा हिस्सा हासिल करने जा रहा है।

रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म: सरकार का रोडमैप

भारत में सेमीकंडक्टर क्रांति की सफलता का मुख्य आधार सरकार की नीतिगत इच्छाशक्ति और गति है।

  • नौकरशाही की बाधाएं खत्म: पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा है कि “फाइल से फैक्टरी तक का समय जितना कम होगा और जितना कम पेपरवर्क होगा, उतनी ही तेजी से वैफर वर्क (Wafer Work) शुरू हो सकेगा।”
  • क्रिटिकल मिनरल्स मिशन: चिप्स बनाने के लिए जरूरी दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Elements & Critical Minerals) की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष राष्ट्रीय मिशन शुरू किया गया है।
  • नेक्स्ट-जेनरेशन रिफॉर्म्स: निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सुगम बनाने, कर संरचना को सरल करने और दीर्घकालिक प्रोत्साहन देने के लिए नए स्तर के नीतिगत सुधार लागू किए जा रहे हैं।

निष्कर्ष: आत्मनिर्भर भारत से विश्व कल्याण

भारत का सेमीकंडक्टर मिशन केवल आयात पर निर्भरता कम करने का साधन नहीं है, बल्कि यह देश को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक निर्णायाक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने की रणनीति है।

भारत ने अपनी यात्रा देर से शुरू की हो सकती है, लेकिन जिस प्रतिबद्धता और स्पीड के साथ भारत आगे बढ़ रहा है, वह दिन दूर नहीं जब दुनिया के हर इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट, वाहन और एआई डिवाइस में लगा छोटा सा चिप गर्व से कहेगा— “Designed in India, Made in India, Trusted by the World!”

यह भी पढ़ें: कटरीना कैफ पोस्टपार्टम ट्रोलिंग: बॉडी-शेमिंग करने वालों को पूर्व सह-कलाकार ने दिया करारा जवाब

Author

  • Rahul Kaushik

    Senior Editor

    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

    पत्रकारिता के क्षेत्र में राहुल कौशिक की लेखन शैली तथ्यात्मक, सहज और पाठकों को जानकारी के साथ जागरूक करने वाली मानी जाती है। वे विशेष रूप से युवा वर्ग, डिजिटल इंडिया, नई तकनीकों और सामाजिक मुद्दों से संबंधित विषयों पर सक्रिय रूप से कार्य करते हैं।

    राहुल कौशिक का उद्देश्य विश्वसनीय, उपयोगी और सकारात्मक पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक सही जानकारी पहुँचाना तथा समाज में जागरूकता को बढ़ावा देना है।

Leave a Comment