AFI की बढ़ी टेंशन! एशियन गेम्स में कहीं भारी न पड़ जाए एथलीट्स की इंजरी?

एशियन गेम्स के महाकुंभ के शुरू होने में अब महज कुछ ही दिनों का समय बचा है, लेकिन भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) और भारतीय खेल प्रेमियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। पिछले कुछ समय से भारतीय ट्रैक एंड फील्ड के कई दिग्गज और उभरते एथलीट्स चोटों (Injuries) से जूझ रहे हैं। खेल के सबसे बड़े मंच पर पदक तालिका में भारत का परचम लहराने की उम्मीदें हमेशा एथलेटिक्स से सबसे ज्यादा जुड़ी होती हैं। ऐसे में प्रमुख खिलाड़ियों की चोटों और फिटनेस समस्याओं ने एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की रातों की नींद उड़ा दी है।

क्या एथलीट्स की यह फिटनेस समस्या एशियन गेम्स में भारत के पदकों के सपने पर पानी फेर देगी? क्या एएफआई (AFI) का इंजरी मैनेजमेंट समय रहते इस संकट से पार पा सकेगा?

चोट की चपेट में स्टार एथलीट्स: पदकों की उम्मीदों को लगा बड़ा झटका

भारतीय एथलेटिक्स दल में पिछले कुछ समय से चोटों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भाला फेंक (Javelin Throw), लंबी कूद (Long Jump), और स्प्रिंटिंग जैसे महत्वपूर्ण इवेंट्स में भारत के पदक दावेदार एथलीट्स फिटनेस समस्याओं से जूझ रहे हैं।

  1. नीरज चोपड़ा की अनुपस्थिति का बड़ा असर: भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा की चोट ने सबसे बड़ा झटका दिया है। ट्रेनिंग के दौरान एंकल लिगामेंट टियर के कारण वे प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गए हैं, जिससे भारत के लिए एक पक्का स्वर्ण पदक हाथ से निकलता दिख रहा है।
  2. अनु रानी और अन्य एथलीट्स का बाहर होना: एशियाई खेलों की गत स्वर्ण पदक विजेता अन्नू रानी योग्यता के मानकों पर खरी नहीं उतर सकीं और फिटनेस व प्रदर्शन के चलते उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। इसके साथ ही लॉन्ग जम्पर शाहनवाज़ खान और स्प्रिंटर नित्या गांधे जैसे उभरते खिलाड़ी भी चोट और मेडिकल कारणों से टीम का हिस्सा नहीं बन पाए हैं।
  3. अन्य खेलों में भी फैला इंजरी संकट: एथलेटिक्स के अलावा वेटलिफ्टिंग में कॉमनवेल्थ गेम्स के रजत पदक विजेता सी. ऋषिकांत सिंह घुटने की गंभीर चोट के कारण बाहर हो चुके हैं, जिससे वेटलिफ्टिंग में पुरुषों का प्रतिनिधित्व ही खत्म हो गया। वहीं वुशू (Wushu) जैसे खेलों में भी चोट और चयन विवाद के चलते अंतिम समय में बदलाव देखने को मिले हैं।

तैयारी और रिकवरी की चुनौती: क्या समय पर फिट हो पाएंगे खिलाड़ी?

एशियन गेम्स जैसे प्रतिस्पर्धी मंच पर खिलाड़ी का केवल 100% फिट होना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसे अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में होना जरूरी है। ज्योति यारराजी (Hurdles), सर्वेश कुशारे (High Jump) और प्रवीण चित्रवेल (Triple Jump) जैसे स्टार एथलीट्स चोट के बाद वापसी कर रहे हैं। हालांकि मेडिकल टीम ने इन्हें खेलने की हरी झंडी दे दी है, लेकिन बिना पर्याप्त अभ्यास और हालिया मैच प्रैक्टिस के मैदान पर उतरना हमेशा जोखिम भरा होता है।

एथलेटिक्स में एक छोटा सा खिंचाव या दर्द भी एथलीट की टाइमिंग और थ्रो की दूरी पर गहरा असर डाल सकता है। जब मुकाबला चीन, जापान और कतर जैसे एशियन दिग्गजों से हो, तो एक मिलीमीटर या सेकंड का सौवां हिस्सा भी मेडल का रंग बदल देता है।

AFI और SAI के सामने क्या हैं मुख्य चुनौतियाँ?

भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) के सामने इस समय तीन सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं:

  • वर्कलोड मैनेजमेंट की कमी: एथलीट्स को साल भर लगातार डोमेस्टिक और इंटरनेशनल सर्किट में प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि पीक सीजन में वर्कलोड का सही प्रबंधन न होना ही बार-बार होने वाली इंजरी का मुख्य कारण है।
  • अंतिम समय में कंफर्मेटरी ट्रायल्स का दबाव: एशियन गेम्स से ठीक पहले आयोजित होने वाले कंफर्मेटरी ट्रायल्स में एथलीट्स को खुद को साबित करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगानी पड़ती है। इस अत्यधिक दबाव में पुरानी चोटों के दोबारा उभरने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
  • बैकअप प्लान की सीमित क्षमता: कई इवेंट्स में भारत के पास सेकंड-लाइन एथलीट्स का ऐसा बैकअप नहीं है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीधा मेडल जीत सके। मुख्य एथलीट के अनफिट होने पर टीम का पदक गणित पूरी तरह बिगड़ जाता है।

क्या भारत दोहरा पाएगा पिछला ऐतिहासिक प्रदर्शन?

पिछले एशियाई खेलों में भारतीय एथलीट्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड पदकों की बौछार की थी। उस प्रदर्शन की वजह से इस बार प्रशंसकों और खेल मंत्रालय की उम्मीदें और भी ज्यादा बढ़ गई हैं। हालांकि AFI अधिकारियों का दावा है कि टीम में अभी भी कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो अपने दम पर पदक जीतने का मादा रखते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रमुख सितारों की अनुपस्थिति और फिटनेस का सस्पेंस भारत की मेडल टेली को प्रभावित कर सकता है।

अब सारा दारोमदार भारतीय मेडिकल टीम, फिजियो और एथलीट्स के मनोबल पर टिका है। यदि भारतीय खिलाड़ी अपनी मानसिक मजबूती और रिकवरी के दम पर मैदान में उतरते हैं, तो वे चुनौतियों को पार कर सकते हैं। लेकिन एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के लिए यह साफ संदेश है—भविष्य में बड़े टूर्नामेंट्स से पहले एथलीट्स के स्वास्थ्य, फिटनेस और स्पोर्ट्स साइंस पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

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