मेरठ के लोहिया नगर में इलेक्ट्रिक बस कंडक्टरों की बेमियादी हड़ताल: 3 महीने से वेतन न मिलने पर धरना

मेरठ। उत्तर प्रदेश के क्रांतिधरा मेरठ में सार्वजनिक परिवहन सेवा को अचानक से बड़ा झटका लगा है। शहर की लाइफलाइन बनती जा रही इलेक्ट्रिक बसों के कंडक्टरों ने वेतन भुगतान की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है। पिछले तीन महीनों से पारिश्रमिक न मिलने से आक्रोशित संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने बसों का परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया है। मंगलवार सुबह से ही लोहिया नगर स्थित इलेक्ट्रिक बस डिपो परिसर में सैकड़ों की संख्या में परिचालक (कंडक्टर) एकत्रित होकर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों के अचानक काम बंद करने से शहर के प्रमुख मार्गों पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और दैनिक यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा।

वेतन की समस्या और कर्मचारियों का आक्रोश

लोहिया नगर इलेक्ट्रिक डिपो में सुबह तड़के जब बसों के निकलने का समय हुआ, तो चालकों और परिचालकों ने बसों की चाबियां डिपो प्रबंधन को सौंपने के बजाय विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। डिपो परिसर में धरने पर बैठे परिचालकों ने प्रबंधन और आउटसोर्सिंग एजेंसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हड़ताली कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले तीन महीनों (जून, जुलाई और अगस्त) से उन्हें एक भी रुपये का वेतन नहीं दिया गया है।

कर्मचारियों का कहना है कि वेतन न मिलने के कारण उनके सामने अब जीवन-यापन का गहरा संकट खड़ा हो गया है। घर का राशन, बच्चों की स्कूल फीस, मकान का किराया और बीमारी के इलाज तक के लिए उनके पास पैसे नहीं बचे हैं। दुकानदार अब उन्हें उधार राशन देने से मना कर रहे हैं, जिससे उनके परिवारों में भुखमरी की नौबत आ गई है। कई बार स्थानीय अधिकारियों और ऑपरेटिंग कंपनी के प्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, हर बार आश्वासन का झुनझुना थमा दिया गया। लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है, जिसके चलते उन्हें मजबूरन हड़ताल जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ा है।

शहर में चरमराई यातायात व्यवस्था

इलेक्ट्रिक बसों की हड़ताल का सीधा और भयावह असर शहर की यातायात प्रणाली पर देखने को मिला। मेरठ के लोहिया नगर डिपो से लगभग 50 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें रोजाना शहर के विभिन्न प्रमुख रूटों पर चलती हैं। ये बसें बेगमपुल, बच्चा पार्क, गढ़ रोड, दिल्ली रोड, कंकरखेड़ा, मलियाना, परतापुर और मोदीपुरम जैसे अति-व्यस्त क्षेत्रों को जोड़ती हैं।

सुबह के समय जब स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र, दफ्तर जाने वाले कर्मचारी और अस्पताल जाने वाले मरीज बस स्टैंडों पर पहुंचे, तो उन्हें बसें गायब मिलीं। बेगमपुल और रेलवे स्टेशन बस स्टैंड पर यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। हड़ताल के चलते सीएनजी ऑटो, ई-रिक्शा और निजी कैब चालकों ने स्थिति का फायदा उठाते हुए यात्रियों से मनमाना किराया वसूलना शुरू कर दिया। जो दूरी यात्री 15 से 20 रुपये में तय करते थे, उसके लिए ई-रिक्शा और ऑटो चालक 50 से 100 रुपये तक वसूलते नजर आए।

प्रबंधन और एजेंसी के बीच उलझा मामला

लोहिया नगर डिपो से चलने वाली इन इलेक्ट्रिक बसों का संचालन नगरीय परिवहन निदेशालय के अंतर्गत किया जाता है, जिसमें मानव संसाधन (कंडक्टर और ड्राइवर) की आपूर्ति एक निजी आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से की जाती है। धरने पर बैठे कर्मचारियों का दावा है कि डिपो प्रबंधन और आउटसोर्सिंग एजेंसी एक

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  • Rahul Kaushik

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