राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों का तापमान तेजी से बढ़ गया है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) पर एक बड़ी और ऐतिहासिक हलचल देखने को मिली है। रूस के तीन मिलिट्री एयरक्राफ्ट, जिनमें प्रसिद्ध भारी-भरकम ट्रांसपोर्ट विमान इल्यूशिन IL-76 भी शामिल है, नोएडा एयरपोर्ट के रनवे पर सुरक्षित उतरे हैं।
यह किसी भी नए या निर्माणाधीन हवाई अड्डे के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, क्योंकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरने वाली यह पहली विदेशी और सैन्य उड़ानों की लैंडिंग है।
रूसी एडवांस टीम का आगमन और प्रोटोकॉल
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तड़के पहुंचे इन तीन रूसी विमानों में रूसी सेना और राष्ट्रपति भवन की उच्चस्तरीय एडवांस सिक्योरिटी और लॉजिस्टिक्स टीम भारत पहुंची है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रोटोकॉल के तहत, जब भी किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष—खासकर रूस जैसे महाशक्ति के प्रमुख—विदेश दौरे पर जाते हैं, तो उनके मुख्य विमान के आगमन से कुछ दिन पहले एक एडवांस सिक्योरिटी टीम भेजी जाती है। यह टीम निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्यों की समीक्षा करती है:
- सुरक्षा व्यवस्था का जायजा: हवाई अड्डे के रनवे, एप्रन एरिया, पार्किंग सुविधाओं और टर्मिनल बिल्डिंग की भौतिक सुरक्षा की गहन जांच।
- रूट मैपिंग और वीवीआईपी मूवमेंट: हवाई अड्डे से लेकर राजधानी दिल्ली में कार्यक्रम स्थल और ठहराव स्थल (होटल) तक के वीवीआईपी कॉन्वॉय (काफिले) के आवागमन के रास्ते तय करना।
- संचार और आपातकालीन सुविधाएं: आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response) और सुरक्षित संचार लाइनों का परीक्षण करना।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आगमन की तैयारी
इस लैंडिंग के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं और उनके आधिकारिक विमान (Presidential Aircraft) की लैंडिंग भी नोएडा एयरपोर्ट पर कराई जा सकती है।
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) पर ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान लगभग 35 से अधिक विशेष वीवीआईपी और चार्टर्ड विमानों का आगमन संभावित है। ऐसे में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और पार्किंग स्पेस पर अत्यधिक दबाव से बचने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और सुरक्षा एजेंसियों ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और हिंडन एयरबेस जैसे नजदीकी ठिकानों को विकल्प और बैकअप पार्किंग के रूप में चुना है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जिसे जेवर एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है, अभी अपने औपचारिक व्यावसायिक संचालन (Commercial Operations) की दहलीज पर है। ऐसे में रूस के भारी सैन्य और रणनीतिक विमानों की पहली सफल लैंडिंग ने इस हवाई अड्डे की क्षमता को वैश्विक पटल पर साबित कर दिया है।
- रनवे की मजबूती व क्षमता: IL-76 जैसे भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का सुरक्षित उतरना यह दर्शाता है कि नोएडा एयरपोर्ट के रनवे की लोड-बेयरिंग क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर अंतरराष्ट्रीय मानकों पर पूरी तरह खरे उतरे हैं।
- सुरक्षा एवं निगरानी: भारतीय वायु सेना (IAF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने रूसी प्रतिनिधियों के साथ मिलकर रनवे पर खड़े विमानों के इर्द-गिर्द त्रिस्तरीय (Three-Tier) सुरक्षा घेरा बना रखा है।
द्विपक्षीय बैठक और कूटनीतिक महत्व
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर, भारत के प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति के बीच एक बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है। इस बैठक में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सौदों की समीक्षा, व्यापारिक लेन-देन में स्थानीय मुद्राओं का उपयोग और वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य (Geopolitics) पर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है।
इस वैश्विक जमावड़े को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाने, फ्लाइंग क्लबों की ट्रेनिंग उड़ानों और किसी भी अनधिकृत हवाई गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
रूस के इन तीन विमानों के आगमन ने यह साफ कर दिया है कि ब्रिक्स सम्मेलन के लिए सुरक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर भारत पूरी तरह तैयार है, और नोएडा एयरपोर्ट देश के नए वीवीआईपी एविएशन हब के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए बिल्कुल मुस्तैद है।
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