रूसी रक्षा उद्योग और क्रेमलिन ने भारत के साथ अपने सबसे आधुनिक 5th जनरेशन फाइटर जेट Su-57 (सुखोई-57) की तकनीक साझा करने और भारत में इसके संयुक्त उत्पादन (Joint Production) की आधिकारिक पेशकश की है।
रक्षा संबंधों में नया मोड़: रूस का प्रस्ताव
वैश्विक भू-राजनीति और रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए क्रेमलिन ने यह स्पष्ट किया है कि वह भारत के साथ केवल हथियारों का विक्रेता और खरीदार का रिश्ता नहीं रखना चाहता। रूस की सरकारी रक्षा निर्यात एजेंसी रोसोबोरोनेक्सपोर्ट (Rosoboronexport) और क्रेमलिन के अधिकारियों के अनुसार, भारत को Su-57 के एक्सपोर्ट वेरिएंट Su-57E के साथ पूरी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (Transfer of Technology – ToT) देने की तैयारी है।
इसका अर्थ यह है कि रूस भारत को केवल तैयार लड़ाकू विमान बेचने के पक्ष में नहीं है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत भारत में ही इन विमानों के निर्माण और असेंबली की अनुमति देने पर विचार कर रहा है।
FGFA प्रोजेक्ट से लेकर Su-57E तक का सफर
भारत और रूस के बीच 5th जनरेशन फाइटर जेट को लेकर बातचीत नई नहीं है:
- FGFA प्रोजेक्ट: साल 2007 में भारत और रूस ने FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोजेक्ट पर एक साथ काम शुरू किया था। हालांकि, वर्क-शेयरिंग, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), टेक्नोलॉजी शेयरिंग और लागत को लेकर भारतीय वायुसेना (IAF) की कुछ चिंताओं के कारण भारत 2018 में इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था।
- रूस का नया ऑफर: अब रूस ने Su-57 को पूरी तरह से विकसित कर रूसी वायुसेना में शामिल कर लिया है। युद्ध अभियानों में इसके प्रदर्शन के बाद रूस ने भारत को अधिक पारदर्शी शर्तों और पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण के साथ नया प्रस्ताव दिया है।
सु-57 की तकनीकी विशेषताएं
| विशेषता | विवरण |
| स्टेल्थ टेक्नोलॉजी | रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) को कम करने के लिए विशेष कोटिंग और डिजाइन |
| सुपरक्रूज क्षमता | बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक गति (ध्वनि की गति से तेज) पर उड़ान |
| सुपर-मैन्यूवरेबिलिटी | 3D थ्रस्ट-वेक्टरिंग इंजन के कारण हवा में असाधारण मोड़ लेने की क्षमता |
| एडवांस्ड एवियोनिक्स | AESA रडार और 360-डिग्री इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर सिस्टम |
| इंटरनल वेपन बे | स्टेल्थ बनाए रखने के लिए मिसाइलों और बमों को विमान के अंदर रखने की सुविधा |
भारत की रणनीति और चुनौतियां
भारतीय वायुसेना (IAF) वर्तमान में अपने स्वदेशी 5th जनरेशन फाइटर जेट AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रही है, जिसे DRDO और ADA द्वारा विकसित किया जा रहा है। ऐसे में रूस के प्रस्ताव को लेकर भारत के पास दो मुख्य विकल्प हैं:
- तत्काल आवश्यकताओं की पूर्ति: AMCA के पूर्ण रूप से परिचालन में आने में समय लग सकता है। इस बीच, दो पड़ोसी मोर्चों (चीन के J-20 और J-31) की चुनौतियों से निपटने के लिए Su-57E का सीमित बेड़ा भारत के लिए अंतरिम समाधान (Interim Solution) बन सकता है।
- स्वदेशी प्रोजेक्ट पर ध्यान: भारतीय रक्षा विशेषज्ञ AMCA को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं ताकि भारत रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके।
क्रेमलिन का यह बयान भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की गहराई को दर्शाता है, लेकिन अंतिम निर्णय भारत की परिचालन आवश्यकताओं और AMCA प्रोजेक्ट की समयसीमा पर निर्भर करेगा।
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