भारतीय सर्राफा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में तेजी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हफ्ते के कारोबारी दिनों के दौरान सोने और चांदी, दोनों ही धातुओं ने रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की है। चांदी के भाव में एक ही दिन में ₹2,176 प्रति किलोग्राम की भारी तेजी देखने को मिली है, जिसके बाद इसका भाव ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, 10 ग्राम सोने की कीमत में ₹374 का इजाफा हुआ है और यह ₹1.53 लाख के स्तर को पार कर गया है। इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक सोने की कीमतों में कुल ₹20,000 की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।
कीमतों में बदलाव का मुख्य विवरण
- चांदी की नई दर: ₹2,176 की वृद्धि के साथ ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम।
- सोने की नई दर: ₹374 की वृद्धि के साथ ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम।
- वार्षिक बढ़त: चालू वर्ष में अब तक सोने के भाव में ₹20,000 प्रति 10 ग्राम का उछाल।
बाजार में तेजी के प्रमुख कारण
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आर्थिक सुस्ती की आहट और भू-राजनीतिक तनावों के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe-haven assets) की ओर रुख कर रहे हैं। जब भी पारंपरिक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ती है, सोने और चांदी की मांग में तेजी आती है।
- केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने के लिए लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं। इस संस्थागत मांग ने बाजार में कीमतों को निचले स्तर पर सहारा दिया है।
- औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी की बढ़ती मांग: चांदी केवल एक आभूषण धातु नहीं है, बल्कि सौर ऊर्जा (सोलर पैनल), इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल उद्योगों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। हरित ऊर्जा की ओर वैश्विक झुकाव के कारण चांदी की औद्योगिक मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जिसका असर इसकी कीमतों पर साफ दिख रहा है।
- रुपये और डॉलर का समीकरण: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत में आयात होने वाले सोने-चांदी के दामों पर पड़ता है। आयात शुल्क और स्थानीय करों के जुड़ने से घरेलू स्तर पर दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले अधिक हो जाती हैं।
खुदरा खरीदारों और निवेशकों पर प्रभाव
सोने और चांदी के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचने से जहां एक ओर पुराने निवेशकों को शानदार रिटर्न मिला है, वहीं दूसरी ओर आम खरीदारों और शादी-ब्याह के सीजन के लिए खरीदारी करने वाले परिवारों के बजट पर गहरा असर पड़ा है।
- आभूषण बाजार की स्थिति: महंगे सोने-चांदी के कारण सर्राफा बाजारों में भौतिक मांग (Physical demand) में थोड़ी नरमी देखी जा रही है। ग्राहक अब भारी आभूषणों के बजाय हल्के वजन वाले गहनों या डिजिटल गोल्ड को तरजीह दे रहे हैं।
- निवेश के विकल्प: वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETF) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प अधिक सुरक्षित और किफायती साबित हो रहे हैं, क्योंकि इनमें मेकिंग चार्ज या स्टोरेज का जोखिम नहीं होता।

आगे क्या है बाजार का अनुमान?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों में जब तक स्थिरता नहीं आती, तब तक बहुमूल्य धातुओं में उतार-चढ़ाव का यह रुख बना रह सकता है। यद्यपि उच्च स्तरों पर मुनाफावसूली (Profit booking) के कारण बीच-बीच में मामूली गिरावट आ सकती है, लेकिन लंबी अवधि के लिए सोने और चांदी का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। खरीदारी करने से पहले निवेशकों को बाजार के रुझान और आधिकारिक बुलियन दरों की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए।