इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटोआ (Anak Krakatau) ज्वालामुखी में भीषण विस्फोट के बाद दो दिनों तक ठप रही उड़ानों की आवाजाही आखिरकार सामान्य हो गई है। सुंडा जलडमरूमध्य (Sunda Strait) में स्थित इस सक्रिय ज्वालामुखी से उठे विशाल राख के बादलों के कारण राजधानी जकार्ता सहित आसपास के प्रमुख हवाई अड्डों पर परिचालन पूरी तरह रोक दिया गया था। अधिकारियों द्वारा हवाई क्षेत्र की सुरक्षा जांच और धावपट्टी (रनवे) की सफाई पूरी करने के बाद उड़ानों को फिर से शुरू करने की अनुमति दी गई है।
अनाक क्राकाटोआ का प्रकोप और हवाई क्षेत्र पर असर
सप्ताहांत में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में हुए शृंखलाबद्ध विस्फोटों से उठे धुएं और राख का गुबार आसमान में कई हजार मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया था। हवा के तेज बहाव के कारण यह महीन राख का बादल राजधानी जकार्ता और पश्चिमी जावा तथा दक्षिणी सुमात्रा के विस्तृत क्षेत्रों में फैल गया।
विमानों के टर्बाइन इंजन में ज्वालामुखीय राख फंसने के गंभीर खतरे को देखते हुए इंडोनेशियाई परिवहन मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से जकार्ता के सोकर्णो-हत्ता अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (Soekarno-Hatta International Airport) तथा हलीम पेरदानाकुसुमा हवाई अड्डे समेत कुल आठ हवाई अड्डों पर संचालन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था।
दो दिनों की बंदी में 3,000 से अधिक उड़ानें प्रभावित
रविवार और सोमवार को रही इस दो दिवसीय पूर्ण बंदी के दौरान उड्डयन क्षेत्र पर भारी असर पड़ा:
- उड़ानों पर असर: लगभग 2,961 उड़ानें (जिनमें 622 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय मार्ग शामिल थे) या तो रद्द कर दी गईं, देरी से चलीं या अन्य सुरक्षित हवाई अड्डों की ओर मोड़ दी गईं।
- यात्रियों की परेशानी: करीब 3,41,000 यात्री विभिन्न हवाई अड्डों पर फंस गए। सिडनी, कुआलालंपुर, सिंगापुर और दोहा जाने वाली अंतर्राष्ट्रीय सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ा।
- वैकल्पिक इंतजाम: स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने पूर्वी और मध्य जावा स्थित सुरबाया तथा सेमारंग जैसे वैकल्पिक हवाई अड्डों की ओर उड़ानों को डायवर्ट करने की व्यवस्था की थी।
उड़ानें फिर शुरू: गहन जांच के बाद दी गई हरी झंडी
ज्वालामुखीय गतिविधियों में थोड़ी कमी आने और हवा की दिशा बदलने के बाद इंडोनेशिया के परिवहन मंत्री दुदी पुरवागांधी ने मंगलवार मध्यरात्रि से हवाई अड्डों को धीरे-धीरे पुनः खोलने की घोषणा की।
परिवहन मंत्रालय के अनुसार, धावपट्टियों (रनवे), टैक्सिवे और खड़े विमानों की गहनता से सफाई की गई ताकि राख का एक भी कण इंजन या संवेदनशील उपकरणों को नुकसान न पहुंचा सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और यदि हवा के रुख में बदलाव के साथ राख का खतरा फिर बढ़ता है, तो तुरंत एहतियाती कदम उठाए जाएंगे।
आम जनजीवन पर असर और आपदा चेतावनी
ज्वालामुखीय राख का असर केवल हवाई सेवाओं तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में आम जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ:
- ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था: राख से होने वाली सांस और आंखों की समस्याओं को देखते हुए प्रभावित इलाकों में स्कूलों को अस्थायी रूप से ऑनलाइन मोड पर स्थानांतरित कर दिया गया।
- सुरक्षा दायरा: तटीय इलाकों के निवासियों, मछुआरों और पर्यटकों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर की दूरी बनाए रखने की सख्त सलाह दी गई है।
अनाक क्राकाटोआ का ऐतिहासिक एवं भौगोलिक महत्व
‘अनाक क्राकाटोआ’ का अर्थ “क्राकाटोआ का बच्चा” होता है। यह द्वीप-ज्वालामुखी 1883 के उस ऐतिहासिक और विनाशकारी क्राकाटोआ विस्फोट के अवशेषों से उत्पन्न हुआ है जिसने वैश्विक तापमान में गिरावट ला दी थी। वर्ष 2018 में इसी ज्वालामुखी के फटने से समुद्र के भीतर भूस्खलन हुआ था, जिससे आई भयानक सुनामी में 430 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” (Ring of Fire) क्षेत्र में स्थित है, जहां 120 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखी हैं। इस कारण यहाँ भूकंप और ज्वालामुखीय विस्फोटों जैसी प्राकृतिक आपदाएं अक्सर देखने को मिलती हैं। फिलहाल उड्डयन प्राधिकरण और मौसम वैज्ञानिक ज्वालामुखी की हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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