दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली का सत्या निकेतन हादसा: 28 घंटे बाद खत्म हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन, 7 लोगों की मौत

दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में हुआ बहुमंजिला इमारत हादसा बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित एक पांच मंजिला बॉयज पेइंग गेस्ट (PG) की इमारत रविवार दोपहर अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भयंकर मलबे में कई छात्र और मजदूर दब गए। लगभग 28 घंटे तक चले राहत और बचाव कार्य के समाप्त होने के बाद 7 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई, जबकि 5 अन्य बुरी तरह घायल हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली फायर सर्विस (DFS), और दिल्ली पुलिस की टीमों ने लगातार कड़ा परिश्रम कर मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला।

हादसे का घटनाक्रम और रेस्क्यू का आंखों देखा हाल

रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे सत्या निकेतन की संकरी गलियों में अचानक एक ज़ोरदार धमाके जैसा शब्द गूंजा। देखते ही देखते पूरी पांच मंजिला इमारत जमींदोज हो गई और चारों तरफ धूल का गुबार छा गया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, आवाज़ इतनी तेज थी कि उन्हें लगा जैसे कोई बड़ा भूकंप आ गया हो।

सूचना मिलते ही राहत एजेंसियां घटनास्थल पर पहुंचीं। संकरी गलियां होने के कारण भारी मशीनों और क्रेन को मौके पर ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। NDRF के जवानों ने कटर, स्नेक कैमरे और खोजी कुत्तों की मदद से मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश शुरू की। रविवार रात भर और सोमवार शाम तक चला यह 28 घंटे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन आखिरकार समाप्त घोषित किया गया।

मृतकों और घायलों की स्थिति

इस हादसे ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए। मारे गए 7 लोगों में ज्यादातर देश के विभिन्न राज्यों से दिल्ली पढ़ाई करने आए युवा छात्र थे, जो इस पीजी में रहकर दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में शिक्षा प्राप्त कर रहे थे:

  • अभिषेक (20 वर्ष) – सोनभद्र, उत्तर प्रदेश
  • युवराज सोनी (20 वर्ष) – दुर्ग, छत्तीसगढ़
  • पवन (17 वर्ष) – औरैया, उत्तर प्रदेश
  • अर्पित जहाज (19 वर्ष) – देवास, मध्य प्रदेश
  • अक्षत सिंह यादव (18 वर्ष) – कटनी, मध्य प्रदेश
  • सुरिंदर सिंह (75 वर्ष) – मजदूर
  • एक अन्य मृतक (जिसकी शिनाख्त प्रक्रिया जारी थी)

घायलों का इलाज एम्स (AIIMS) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, इनमें से कुछ छात्रों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।

हादसे की मुख्य वजह: बेसमेंट का निर्माण और अवैध निर्माण

प्रारंभिक जांच में हादसे का मुख्य कारण इमारत के बेसमेंट में चल रहा मरम्मत व जीर्णोद्धार का काम और वहां जमा पानी माना जा रहा है।

  1. अवैध निर्माण: इमारत में बिना किसी ढांचागत सुरक्षा ऑडिट या उचित अनुमति के पांचवीं मंजिल खड़ी की गई थी।
  2. बेसमेंट में पानी का भराव: बारिश के कारण बेसमेंट में पानी जमा हो गया था, जिसने इमारत की नींव को कमजोर कर दिया था।
  3. कमजोर नीव में खुदाई: बिना किसी सुरक्षा मानकों का पालन किए बेसमेंट में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य ने पुरानी इमारत के पिलरों पर अतिरिक्त दबाव डाला, जिससे पूरी इमारत पलक झपकते ही ढह गई।

सख्त प्रशासनिक कार्रवाई: मकान मालिक गिरफ्तार, 5 एमसीडी अधिकारी निलंबित

हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है:

  • गिरफ्तारी: दिल्ली पुलिस ने मकान मालिक हरिराम गुप्ता (81), उनकी पत्नी उर्मिला (75) और उनके बेटे महेश (52) को गिरफ्तार कर लिया है। हरिराम को राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा गया, जो हादसे के बाद फरार हो गया था।
  • अधिकारियों पर गाज: नगर निगम (MCD) के साउथ ज़ोन के डिप्टी कमिश्नर सहित 5 अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
  • हाईकोर्ट की टिप्पणी व जांच: दिल्ली हाईकोर्ट ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए इसे “अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और MCD की लापरवाही पर फटकार लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
  • शहरव्यापी अभियान: दिल्ली सरकार ने निर्देश दिए हैं कि शहर भर में अवैध रूप से बनाई गई पांचवीं मंजिलों को तुरंत सील किया जाए और छात्रों के पीजी के रूप में चलने वाली इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य किया जाए।

छात्रों में दहशत और उठते सवाल

सत्या निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस का एक प्रमुख केंद्र है, जहां देश भर से हजारों छात्र किराए पर कमरे लेकर रहते हैं। इस हादसे के बाद आसपास की पीजी इमारतों में रहने वाले छात्रों में गहरा डर फैल गया है। कई छात्र सुरक्षा कारणों से अपने कमरे खाली करके वापस घर लौटने या दूसरी सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट होने लगे हैं।

छात्र संगठनों ने मांग की है कि दिल्ली में बिना किसी सुरक्षा प्रमाणपत्र के चलाए जा रहे व्यावसायिक पीजी पर सख्त नकेल कसी जाए। कम जगह में ज्यादा पैसा कमाने की लालच में मकान मालिक बिना किसी नक्शे या एनओसी (NOC) के पांच-छह मंजिलें खड़ी कर देते हैं, जिससे छात्रों की जान हमेशा जोखिम में रहती है। सत्या निकेतन का यह हादसा सिर्फ एक ढांचागत विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का एक कड़वा उदाहरण है।

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  • Rahul Kaushik

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