जनसमाज संवाददाता, नई दिल्ली: जापानी धरती पर होने जा रहे ऐची-नागोया एशियाई खेल में भारतीय एथलेटिक्स दल तिरंगा फहराने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत की दो स्टार एथलीट—पारुल चौधरी और प्रियंका गोस्वामी—इस बार केवल पुराने ट्रैक पर दौड़ने नहीं, बल्कि बिल्कुल नए इवेंट्स और कठोर चुनौतियों का सामना करते हुए देश के लिए पदक जीतने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतर रही हैं। जहां एशियन गेम्स की दोहरी स्वर्ण पदक विजेता पारुल चौधरी इस बार तीन अलग-अलग दौड़ स्पर्धाओं में हिस्सा लेकर अपनी सहनशक्ति और स्पीड का लोहा मनवाएंगी, वहीं राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता प्रियंका गोस्वामी ने 10,000 मीटर रेस वॉक छोड़कर 42.2 किलोमीटर की मैराथन रेस वॉक जैसे कठिन इवेंट में खुद को झोंक दिया है। दोनों ही एथलीटों के लिए यह सफर आसान नहीं रहा है, लेकिन बेंगलुरु स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) केंद्र में विशेष सिमुलेशन और तकनीकी बदलावों के बल पर दोनों पदक की प्रबल दावेदार बनी हुई हैं।
पारुल चौधरी की ट्रिपल चुनौती: 1500 मीटर, 5000 मीटर और 3000 मीटर स्टीपलचेज
चीन के हांगझाउ में आयोजित पिछले एशियाई खेलों में 3000 मीटर स्टीपलचेज में स्वर्ण और 5000 मीटर में ऐतिहासिक गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली पारुल चौधरी इस बार खुद को एक नई सीमा तक धकेल रही हैं। ऐची-नागोया में पारुल केवल अपने पिछले खिताबों का बचाव नहीं करेंगी, बल्कि 1500 मीटर की दौड़ में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
लगातार तीन दिनों में तीन उच्च-तीव्रता वाली स्पर्धाओं में भाग लेना शारीरिक और मानसिक रूप से एक अत्यधिक कठिन कार्य है। इस पर बात करते हुए पारुल चौधरी ने स्पष्ट किया कि 1500 मीटर दौड़ का जुड़ना उन पर अतिरिक्त दबाव नहीं बनाता है। उनका मानना है कि सही रिकवरी और रणनीतिक तैयारी से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।
“लगातार तीन दिनों तक मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन मेरी ट्रेनिंग इसी शेड्यूल को ध्यान में रखकर बनाई गई है। मैं किसी भी प्रकार का मानसिक दबाव नहीं लेती। मेरा ध्यान सिर्फ अपनी प्रक्रिया और सर्वोत्तम प्रदर्शन पर है, पदक अपने आप फॉलो करेगा।” — पारुल चौधरी
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में ठंडे मौसम और कठिन परिस्थितियों के कारण पारुल का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था, जहां वह स्टीपलचेज में 5वें स्थान पर और 5000 मीटर में 15वें स्थान पर रही थीं। हालांकि, उन्होंने अपनी उन गलतियों को स्वीकार करते हुए उनसे सबक लिया है और अब जापान के गर्म तथा आर्द्र (Hot and Humid) मौसम के अनुसार ढलने के लिए अपनी रणनीति बदली है।
प्रियंका गोस्वामी का नया ट्रैक: 10 किमी स्पीड से 42.2 किमी मैराथन का सफर
दूसरी ओर, भारतीय रेस वाकिंग की स्टार खिलाड़ी प्रियंका गोस्वामी के लिए यह एशियाई खेल किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं। 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में 10,000 मीटर रेस वॉक में ऐतिहासिक रजत पदक जीतने वाली प्रियंका इस बार 42.2 किलोमीटर की मैराथन रेस वॉक में भारत का नेतृत्व करेंगी।
10 किलोमीटर और 42.2 किलोमीटर के बीच का अंतर केवल दूरी का नहीं, बल्कि पूरी खेल तकनीक का है। छोटी दूरी में जहां मुख्य ध्यान गति (Speed) पर होता है, वहीं मैराथन रेस वॉक में सहनशक्ति (Endurance), पेसिंग और ऊर्जा प्रबंधन सर्वोपरि होता है।
- तकनीकी बदलाव: 10 किमी की स्पीड-आधारित वॉक के मुकाबले 42.2 किमी में शरीर के हाइड्रेशन और एनर्जी मैनेजमेंट को संतुलित रखना पड़ता है।
- प्रतिस्पर्धा का स्तर: एशियाई स्तर पर रेस वॉकिंग की प्रतिस्पर्धा ओलंपिक के समकक्ष मानी जाती है, क्योंकि चीन और जापान के वॉकर दुनिया में शीर्ष पर हैं।
प्रियंका का मानना है कि एशियाई स्तर पर मुकाबला बेहद कड़ा होगा, लेकिन लंबी दूरी की ट्रेनिंग ने उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ाया है।
जापानी परिस्थितियों के लिए SAI का विशेष सिमुलेशन मॉडल
जापान में आयोजकों ने स्थान की कमी और अनोखी व्यवस्था के तहत एथलीटों के ठहराव के लिए ‘कंटेनर-शैली’ के कमरों (Container Accommodations) और क्रूज़ शिप का उपयोग किया है। भारतीय एथलीटों को जापान पहुंचने पर किसी सांस्कृतिक या वातावरणीय झटके (Culture & Climate Shock) का सामना न करना पड़े, इसके लिए SAI बेंगलुरु केंद्र ने विशेष इंतज़ाम किए हैं:
- कंटेनर-रूम इंसुलेशन सिमुलेशन: SAI केंद्र पर विशेष इंसुलेटेड पफ-पैनल वाले कंटेनर रूम तैयार किए गए हैं, ताकि खिलाड़ी वहां रहकर पहले से ही उन परिस्थितियों में ढल सकें।
- जापानी खान-पान का प्रशिक्षण: एथलीटों को जापानी आहार और वहां के पोषण मानकों के अनुकूल बनाने के लिए भोजन में भी विशेष बदलाव किए गए हैं।
- गर्मी व नमी के लिए अनुकूलन: जापान के आर्द्र मौसम के अनुसार खिलाड़ियों का वर्कआउट शेड्यूल तैयार किया गया है।
पदक तालिका पर भारत की नजरें
भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) द्वारा घोषित 77-सदस्यीय मजबूत एथलेटिक्स दल में पारुल चौधरी और प्रियंका गोस्वामी मुख्य स्तंभों में से एक हैं। जापान और बहरीन के विश्वस्तरीय एथलीटों के बीच पारुल का लक्ष्य अपने स्वर्ण पदकों की रक्षा करना है, जबकि प्रियंका का लक्ष्य पहली बार मैराथन रेस वॉक में महाद्वीपीय स्तर पर तिरंगा फहराना है।
दोनों खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता, नए इवेंट्स को अपनाने का साहस और आधुनिक वैज्ञानिक ट्रेनिंग यह दर्शाती है कि भारतीय एथलेटिक्स अब केवल भाग लेने नहीं, बल्कि विश्व पटल पर राज करने की नीयत से उतर रहा है। ऐची-नागोया में उनकी सफलता भारतीय खेलों के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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