तापसी पन्नू का छलका दर्द: ‘अल्फा’ के फ्लॉप होने से छीनीं मेरी फिल्में

अभिनेत्री तापसी पन्नू अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं। फिल्म उद्योग में चल रहे जेंडर और बजट के दोहरे मापदंडों पर उन्होंने खुलकर अपनी राय रखी है। एक हालिया इंटरव्यू में तापसी ने खुलासा किया कि जब कोई बड़े बजट की फीमेल-सेंट्रिक फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल होती है, तो उसका खामियाजा सिर्फ उसी फिल्म की टीम को नहीं, बल्कि इंडस्ट्री की अन्य महिला अभिनेत्रियों को भी भुगतना पड़ता है।

तापसी के अनुसार, आलिया भट्ट और शरवरी वाघ स्टारर स्पाई थ्रिलर ‘अल्फा’ के कमजोर प्रदर्शन के बाद निवेशकों और निर्माताओं के रुख में बड़ा बदलाव देखा गया। इसके चलते उनके हाथ से भी कुछ प्रोजेक्ट्स निकल गए और कई फिल्में ठंडे बस्ते में चली गईं।

‘अल्फा’ की असफलता का प्रभाव

यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल-लीड फिल्म ‘अल्फा’ भारी-भरकम बजट और काफी उम्मीदों के साथ सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी।

तापसी ने बताया कि जब इस तरह की महत्वाकांक्षी फिल्में असफल होती हैं, तो फिल्म फाइनेंसर्स और इन्वेस्टर्स तुरंत पीछे हटने लगते हैं। उनके शब्द थे:

“हर साल ऐसा ही होता है। जैसे ही कोई बड़ी फीमेल-लीड फिल्म फ्लॉप होती है, बाजार में यह चर्चा शुरू हो जाती है कि ‘आजकल फीमेल-ड्रिवन सिनेमा नहीं चल रहा है।’ निर्माता कहने लगते हैं कि जब इतनी बड़ी सुपरस्टार की फिल्म नहीं चल सकी, तो बाकी फिल्मों का क्या होगा।”

उद्योग में दोहरा मापदंड और असमानता

तापसी पन्नू ने पुरुष-प्रधान और महिला-प्रधान फिल्मों के मूल्यांकन में मौजूद असमानता को रेखांकित किया:

  • मूल्यांकन का पैमाना: पुरुष अभिनेताओं की एक्शन फिल्मों की कहानी यदि औसतन कमजोर भी हो, तो भी दर्शक उसे स्वीकार कर लेते हैं। इसके विपरीत, यदि किसी महिला अभिनेत्री की फिल्म पर बड़ा बजट लगाया गया हो, तो उससे बेहतरीन से बेहतरीन (21/20) परिणाम की उम्मीद की जाती है।
  • गलती की गुंजाइश नहीं: फीमेल-सेंट्रिक फिल्मों में निर्माताओं के पास जोखिम लेने की गुंजाइश (Delta) लगभग शून्य या नकारात्मक होती है। थोड़ी सी भी चूक होने पर पूरे जॉनर पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं।
  • सामूहिक असर: एक बड़ी विफलता के कारण विकास के चरण में मौजूद कई अन्य महिला-केंद्रित प्रोजेक्ट्स अचानक बंद या रद्द कर दिए जाते हैं।

सफलता का सकारात्मक पहलू

जहाँ एक फिल्म की असफलता नुकसान पहुँचाती है, वहीं तापसी ने यह भी स्वीकार किया कि जब कोई फीमेल-लीड फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल होती है, तो इसका फायदा पूरी इंडस्ट्री को मिलता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई महिला-केंद्रित हॉरर या थ्रिलर फिल्म हिट हो जाती है, तो निर्माता तुरंत वैसी ही अन्य कहानियों पर निवेश करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

तापसी का मानना है कि बॉलीवुड में महिला कलाकारों को एक साथ मिलकर इस चुनौती का सामना करना पड़ता है, क्योंकि सभी एक ही नाव में सवार हैं।

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  • Rashika Sharma

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