रामानंद सागर के पौराणिक धारावाहिक ‘रामायण’ में भगवान श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण का कालजयी किरदार निभाने वाले वरिष्ठ अभिनेता सुनील लहरी एक बार फिर मीडिया की सुर्खियों में हैं। पिछले कई दशकों से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले सुनील लहरी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं और अक्सर देश, समाज व सामयिक मुद्दों पर अपने विचार खुलकर साझा करते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने एक बयान को लेकर जनमानस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने स्वीकार किया कि वे भावनाओं के अतिरेक में बह गए थे, जिसके कारण उनसे एक अनुचित वक्तव्य जारी हो गया। उनके इस स्पष्टीकरण और माफी मांगने का वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
आखिर क्या था पूरा मामला?
हाल ही में देश में हुए लोकसभा चुनावों के नतीजों के दौरान सुनील लहरी ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या (फैजाबाद लोकसभा सीट) के चुनावी रुझानों पर प्रतिक्रिया दी थी। अयोध्या में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की हार से सुनील लहरी बेहद व्यथित और स्तब्ध हो गए थे। इसी निराशा और दुख के आवेग में आकर उन्होंने सोशल मीडिया पर अयोध्या के मतदाताओं को लेकर कुछ कड़े और तीखे शब्दों का प्रयोग कर दिया था।
उन्होंने अयोध्यावासियों की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘स्वार्थी’ तक कह दिया था और तुलनात्मक रूप से सीता माता के प्रति ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख कर दिया था। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने उनके इस बयान की कड़ी आलोचना की, तो वहीं अयोध्या के स्थानीय निवासियों ने भी उनकी टिप्पणी पर गहरी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि किसी एक राजनीतिक परिणाम के आधार पर पूरी पवित्र नगरी और वहां के सम्मानित नागरिकों के चरित्र पर उंगली उठाना सर्वथा अनुचित है।
वीडियो जारी कर जाहिर किया पछतावा
आलोचनाओं के व्यापक स्तर को देखते हुए और अपनी भूल का अहसास होते ही सुनील लहरी ने बिना किसी देरी के एक नया वीडियो संदेश जारी किया। इस वीडियो में उनके चेहरे पर स्पष्ट रूप से अपनी गलती का पश्चाताप देखा जा सकता है।
सुनील लहरी ने हाथ जोड़कर जनसाधारण और विशेषकर अयोध्या के निवासियों से क्षमा याचना की। उन्होंने कहा, “मैं स्वीकार करता हूं कि उस दिन चुनावी नतीजे देखकर मैं अत्यधिक भावुक हो गया था। भावनाओं के बहकावे में आकर मुझसे वह बयान निकल गया। मेरा उद्देश्य किसी की आस्था, सम्मान या भावनाओं को ठेस पहुंचाना बिल्कुल नहीं था। यदि मेरे शब्दों से अयोध्या की महान जनता या मेरे किसी प्रशंसक का दिल दुखा है, तो मैं सहृदय हाथ जोड़कर आप सभी से माफी मांगता हूं।”
उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट किया कि वे अयोध्या और वहां के निवासियों का अत्यंत सम्मान करते हैं। श्रीराम मंदिर के निर्माण से अयोध्या नगरी ने जो आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव प्राप्त किया है, वह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।
दर्शकों और प्रशंसकों की प्रतिक्रिया
सुनील लहरी द्वारा अपनी गलती स्वीकार करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के इस कदम की सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना हो रही है। उनके प्रशंसकों और आम जनता का मानना है कि अपनी भूल को स्वीकार करना और उसके लिए सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगना एक सच्चे और महान इंसान की पहचान होती है।
सोशल मीडिया पर यूजर उनके इस वीडियो पर प्रतिक्रियाएं देते हुए लिख रहे हैं कि इंसान से गलतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन सही समय पर अपनी भूल का बोध होना और नम्रता से माफी मांगना सुनील लहरी के बड़प्पन को दर्शाता है। कई लोगों ने यह भी टिप्पणी की कि रामचरितमानस और रामायण हमें यही सिखाती है कि यदि क्रोध या भावुकता में कोई त्रुटि हो जाए, तो विनम्रता से उसे सुधार लेना ही धर्म है।
रामायण का ‘लक्ष्मण’ किरदार और जनमानस में छवि
वर्ष 1987 में प्रसारित हुए धारावाहिक ‘रामायण’ में लक्ष्मण के रूप में सुनील लहरी के अभिनय को आज भी भारतीय टेलीविजन इतिहास के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में गिना जाता है। लक्ष्मण का चरित्र स्वभाव से उग्र, भावुक, न्यायप्रिय और श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति से भरा हुआ था। सुनील लहरी ने इस चरित्र के क्रोध, भ्रातृ-प्रेम और स्वाभिमान को इतनी जीवंतता से पर्दे पर उतारा था कि लोग उन्हें वास्तव में लक्ष्मण का ही स्वरूप मानने लगे थे।
कोरोना काल के दौरान जब देशव्यापी लॉकडाउन में रामायण का पुनः प्रसारण हुआ, तो सुनील लहरी एक बार फिर नई पीढ़ी के बीच रातों-रात अत्यंत लोकप्रिय हो गए। सोशल मीडिया पर उनके मीम्स और पुराने किस्से काफी ट्रेंड करने लगे। इस वजह से जब भी वे किसी सामाजिक या राजनीतिक मुद्दे पर अपनी राय रखते हैं, तो वह राष्ट्रीय मीडिया में तुरंत चर्चा का विषय बन जाती है।
सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारियों का अहसास
सुनील लहरी के इस पूरे घटनाक्रम ने यह सिद्ध कर दिया है कि एक लोकप्रिय सेलिब्रिटी होने के नाते समाज में अपनी बात रखते समय कितना सतर्क रहना आवश्यक होता है। उन्होंने इस बात को स्वयं स्वीकार किया कि एक सार्वजनिक व्यक्तित्व होने के नाते उनके शब्दों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। भावुकता में दिया गया कोई भी वक्तव्य लोगों की भावनाओं को आहत कर सकता है।
सुनील लहरी का यह माफीनामा न केवल उनके प्रशंसकों के लिए बल्कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले हर व्यक्ति के लिए एक सीख है। अपनी गलती को मानकर नम्रतापूर्वक क्षमा याचना करने से व्यक्ति का कद घटता नहीं, बल्कि समाज की नजरों में और बढ़ जाता है। फिलहाल, सुनील लहरी के इस सौहार्दपूर्ण कदम के बाद यह विवाद अब शांत होता नजर आ रहा है और उनके प्रशंसक उनके इस रवैये की भूरी-भूरी प्रशंसा कर रहे हैं।
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