वियतनाम की दिग्गज इलेक्ट्रिक वाहन (EV) निर्माता कंपनी विनफास्ट (VinFast) को लेकर हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कंपनी ने अपनी गाड़ियों का प्रोडक्शन रोक दिया है। इस खबर के सामने आते ही ऑटोमोबाइल सेक्टर से लेकर निवेशकों और आम खरीदारों के बीच हड़कंप मच गया। हालांकि, विवाद और भ्रम की स्थिति पैदा होने के तुरंत बाद कंपनी की ओर से एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स से फैला भ्रम
दरअसल, रॉयटर्स (Reuters) की एक रिपोर्ट में अज्ञात सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया कि विनफास्ट ने भारत और वैश्विक बाजारों के लिए अपनी स्थानीय विनिर्माण योजनाओं और कुछ नए मॉडल प्रोजेक्ट्स (जैसे VF 3, VF 6 और VF 7) को लागत पुनर्मूल्यांकन (Cost Reassessment) के चलते अस्थायी रूप से रोक दिया है और सप्लायर्स को भी काम रोकने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही यह कयास लगाए जाने लगे कि क्या कंपनी भारत जैसे बड़े बाजार से हाथ पीछे खींच रही है या इसका उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है।
कंपनी का आधिकारिक रुख: प्रोडक्शन बंद नहीं हुआ
तमाम विवादों और अटकलों पर विराम लगाते हुए विनफास्ट के आधिकारिक प्रवक्ता ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि कंपनी ने भारत या अपने किसी मुख्य बाजार में उत्पादन रोका या निलंबित नहीं किया है।
कंपनी ने अपने बयान में प्रमुख रूप से ये बातें कही हैं:
- सीकेडी असेंबली जारी रहेगी: तमिलनाडु के तूथुकुडी (Thoothukudi) स्थित विनिर्माण संयंत्र में गाड़ियों का असेंबली कार्य पूरी तरह से जारी है। कंपनी वर्तमान में सीकेडी (Completely Knocked Down) किट के जरिए अपने मॉडल्स तैयार कर रही है।
- लोकल मैन्युफैक्चरिंग और लागत मूल्यांकन: कंपनी भारत के लिए विशेष रूप से डिजाइन और विकसित किए जाने वाले भविष्य के मॉडल्स के लिए स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला (Local Supply Chain) और विनिर्माण लागत का पुनर्मूल्यांकन कर रही है। भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए स्थानीयकरण (Localisation) प्रक्रिया का अध्ययन करना एक सामान्य कॉर्पोरेट रणनीति है, न कि उत्पादन बंद करना।
- मेक इन इंडिया के प्रति प्रतिबद्धता: कंपनी ने स्पष्ट किया कि भारत उनके दीर्घकालिक रोडमैप का बेहद अहम हिस्सा है और वे ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्थानीय स्तर पर अपनी हिस्सेदारी और बढ़ा रहे हैं।

विनफास्ट की रणनीति और भविष्य के प्रोजेक्ट्स
| पहलू | स्थिति / विवरण |
| वर्तमान मैन्युफैक्चरिंग | तमिलनाडु (तूथुकुडी) प्लांट में सीकेडी किट के जरिए असेंबली जारी। |
| प्लांट विस्तार (Phase 2) | द्वितीय चरण के विस्तार के लिए निवेश और आवश्यक मंजूरियां प्रक्रियाधीन/स्वीकृत। |
| लोकल सप्लाई चैन | 300 से अधिक भारतीय सप्लायर्स के साथ बैठकें और साझेदारी के प्रयास जारी। |
| बाजार रणनीति | भारतीय ग्राहकों की प्राथमिकताओं के अनुसार उत्पादों को ढालना। |
विवाद का मुख्य कारण: ‘उत्पादन रोकना’ बनाम ‘सप्लाई चैन री-अलाइनमेंट’
ऑटोमोबाइल विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे विवाद के पीछे शब्दावली का भ्रम था। कंपनी ने अपने भविष्य के कुछ स्थानीय कंपोनेंट प्रोजेक्ट्स के लागत मॉडल की समीक्षा के लिए सप्लायर्स से अस्थायी संवाद किया था, जिसे मीडिया रिपोर्ट्स में ‘प्रोडक्शन हॉल्ट’ या ‘कारखाने की तालाबंदी’ के रूप में समझ लिया गया।
भारतीय ऑटो बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा, टाटा, महिंद्रा और एमजी जैसी स्थापित कंपनियों की मौजूदगी के कारण किसी भी विदेशी ब्रांड के लिए लागत पर नियंत्रण (Cost Control) और लोकल स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। विनफास्ट इसी रणनीति के तहत काम कर रहा है।
विनफास्ट ने अपने बयान से यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि शोरूम में बिक रही गाड़ियों की असेंबली और डिलीवरी पर कोई असर नहीं पड़ा है। कंपनी भारत में अपने दीर्घकालिक निवेश और मैन्युफैक्चरिंग बेस को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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