ऑपरेशन सिंदूर के हीरो जितेंद्र मिश्र कैसे बने राम मंदिर के CEO? जानें 3 बड़ी वजहें

जनसमाज संवाददाता,अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रशासनिक मोड़ आया है। अयोध्या में निर्मित भव्य राम मंदिर के प्रशासनिक, वित्तीय और सुरक्षात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद का गठन किया गया है। इस ऐतिहासिक और शीर्ष प्रशासनिक जिम्मेदारी के लिए भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (रिटायर्ड) के नाम पर अंतिम मुहर लगी है।

भारतीय वायुसेना के ‘वेस्टर्न एयर कमांड’ के प्रमुख रह चुके और ऐतिहासिक ऑपरेशन सिंदूर’ में रणनीतिक कौशल का परचम लहराने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। शुरुआत में इस पद की होड़ में देश के कई बड़े पूर्व आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों के नाम तैर रहे थे। लेकिन 5,500 से अधिक आवेदनों और गहन चयन प्रक्रिया के बाद, ट्रस्ट ने सैन्य अनुशासन और प्रशासनिक अनुभव से लैस जितेंद्र मिश्र पर भरोसा जताया।

ऑपरेशन सिंदूर के ‘हीरो’ से राम मंदिर के CEO तक का सफर

पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का जीवन और सैन्य करियर असाधारण उपलब्धियों से भरा रहा है। 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में बतौर फाइटर पायलट कमीशन पाने वाले जितेंद्र मिश्र ने लगभग चार दशकों तक देश की सीमाओं की रक्षा की। अपने सेवाकाल में उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू विमान उड़ाए और 3,000 घंटे से अधिक की सफल उड़ान का अनुभव हासिल किया।

वे भारतीय वायुसेना में ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ और ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ जैसे प्रतिष्ठित नागरिक व सैन्य सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं।

  • कारगिल युद्ध से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक: कारगिल युद्ध के दौरान मिराज-2000 लड़ाकू विमानों से लेजर गाइडेड बमों के सटीक संचालन में उनकी अहम भूमिका रही। वहीं, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान वे पश्चिमी वायु कमान (Western Air Command) के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) थे। उनके नेतृत्व में पश्चिमी सीमा पर वायुसेना ने बेजोड़ रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया था।

जितेंद्र मिश्र को चुनने की तीन बड़ी वजहें

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा इस पद के लिए चयन प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी और बहुस्तरीय रखी गई थी। शुरुआती चर्चाओं में भले ही उनका नाम पहली कतार में न दिखा हो, लेकिन जब योग्यता, अनुभव और नेतृत्व की अंतिम कसौटी पर परख हुई, तब वे सबसे आगे निकल गए। उनके चयन की तीन प्रमुख वजहें निम्नलिखित हैं:

1. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का रणनीतिक नेतृत्व और राष्ट्रीय साख

चयन की सबसे पहली और बड़ी वजह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनका कुशल व निर्णायक नेतृत्व रहा। देश के पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना की कमान संभालते हुए उन्होंने जटिल परिस्थितियों में त्वरित और सटीक निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता दिखाई थी।

  • सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल: युद्धकालीन परिस्थितियों में असाधारण नेतृत्व के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य पुरस्कारों में शामिल ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से नवाजा गया।
  • उच्च स्तरीय पहचान: ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब प्रधानमंत्री ने आदमपुर एयरबेस का दौरा किया था, तब जितेंद्र मिश्र के नेतृत्व और उनकी रणनीतिक योजना की व्यापक सराहना हुई थी। ट्रस्ट का मानना है कि राम मंदिर जैसे वैश्विक स्तर के राष्ट्रीय और सांस्कृतिक केंद्र के प्रबंधन के लिए ऐसी मजबूत साख और उच्च नेतृत्व क्षमता वाले व्यक्ति की आवश्यकता थी।
ऑपरेशन सिंदूर के हीरो जितेंद्र मिश्र

2. चार दशकों का कठोर सैन्य और प्रशासनिक अनुभव

39 से अधिक वर्षों के लंबे सैन्य करियर के दौरान जितेंद्र मिश्र ने सिर्फ विमान ही नहीं उड़ाए, बल्कि कई बड़े प्रशासनिक पदों और बहु-आयामी प्रोजेक्ट्स की कमान भी संभाली।

  • विशाल प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन: वे ‘हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड’ (HAL) में चीफ टेस्ट पायलट रहे, एयरक्राफ्ट अपग्रेड प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर रहे और सुखोई-30 (Su-30 MKI) एयरबेस पर चीफ ऑपरेशन्स ऑफिसर के पद पर रहे।
  • जटिल व्यवस्थाओं का संचालन: अयोध्या स्थित राम मंदिर परिसर अब केवल एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि एक वृहद व्यवस्था है जहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होता है। मंदिर के बुनियादी ढांचे के विकास, सुरक्षा प्रोटोकॉल, भीड़ नियंत्रण और पारदर्शी प्रबंधन के लिए सैन्य अनुशासन से लैस प्रशासक की सख्त जरूरत थी। वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों में जवाबदेही और पूर्ण अनुशासन बनाए रखने में उनका यह अनुभव मील का पत्थर साबित होगा।

3. उत्तर प्रदेश से गहरा सांस्कृतिक व सामाजिक जुड़ाव

जितेंद्र मिश्र की तीसरी सबसे मजबूत पक्ष उनका उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना और स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव है।

  • देवरिया से नाता: वे उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बनकटा ब्लॉक स्थित भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं।
  • संस्कृति और भाषा की समझ: सरयूपारीण पृष्ठभूमि और उत्तर प्रदेश की माटी से जुड़े होने के कारण वे क्षेत्र की जनभावनाओं, भाषा और धार्मिक परंपराओं को गहराई से समझते हैं। ट्रस्ट का मानना है कि जहां एक तरफ उनके पास वैश्विक स्तर का सैन्य अनुशासन है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश से उनका भावनात्मक रिश्ता मंदिर के रोजमर्रा के संचालन और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में काफी उपयोगी साबित होगा।

चयन प्रक्रिया: 5,500 आवेदनों से लेकर AI स्क्रूटनी तक

राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ पद पाना आसान नहीं था।

  1. आवेदनों का अंबार: इस पद के लिए देशभर से 5,585 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे।
  2. AI और तकनीक से छंटनी: ट्रस्ट के सचिवालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सूचना तकनीक और डेटा वेरिफिकेशन का सहारा लेकर शुरुआती आवेदनों को छांटा।
  3. शॉर्टलिस्टिंग और इंटरव्यू: इसके बाद 16 प्रमुख अभ्यर्थियों के व्यक्तिगत इंटरव्यू किए गए।
  4. अंतिम तीन का पैनल: तीन वरिष्ठ अधिकारियों का अंतिम पैनल तैयार हुआ, जिसमें से ट्रस्ट की उच्च स्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के नाम का चयन किया गया।

क्यों पड़ी राम मंदिर में CEO की जरूरत?

हाल के समय में राम मंदिर परिसर के संचालन का दायरा अत्यधिक विस्तृत हुआ है। दान-चढ़ावे की व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता लाने, वित्तीय गंतव्यों की जवाबदेही तय करने, श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं के विकास और सुरक्षा प्रबंधन को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने पहली बार एक कॉर्पोरेट व पेशेवर प्रशासनिक ढांचा (CEO व्यवस्था) तैयार करने का निर्णय लिया है।

नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्र के सामने अब मंदिर परिसर के मास्टर प्लान को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने, रोजमर्रा की वित्तीय-प्रशासकीय प्रक्रियाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने और देश-दुनिया से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के सुखद एवं सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती और अवसर होगा।

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  • Rahul Kaushik

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