देशभर में मानसूनी बारिश का दौर अब विनाशकारी रूप ले चुका है। उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तक कई राज्य कुदरत के इस भीषण कहर से कराह रहे हैं। कहीं पहाड़ों के दरकने से सड़कें और बस्तियां जमींदोज हो रही हैं, तो कहीं नदियां खतरे के निशान से ऊपर बहकर रिहाइशी इलाकों को जलमग्न कर रही हैं। उत्तराखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बाढ़ और बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
उत्तराखंड: बादल फटने और भूस्खलन से तबाही, 12 लोगों की मौत
देवभूमि उत्तराखंड में कुदरत का सबसे भयानक रूप देखने को मिल रहा है। पहाड़ी जिलों में लगातार जारी मुसलाधार बारिश और जगह-जगह हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) ने जनजीवन को ठप कर दिया है। बद्रीनाथ और केदारनाथ राजमार्ग समेत सैकड़ों संपर्क मार्ग मलबे के कारण पूरी तरह बंद हो चुके हैं। बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं—जैसे घर ढहने, भूस्खलन और नदी के तेज बहाव में बहने—के कारण अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर देहरादून, नैनीताल, चमोली और पौड़ी गढ़वाल जैसे संवेदनशील जिलों में कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। नदियों का जलस्तर खतरे के स्तर को पार कर चुका है और निचले इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
बिहार: उफान पर गंगा और कोसी, 40 से अधिक गांव जलमग्न
पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के कारण बिहार में भीषण बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नेपाल और ऊपरी इलाकों से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी की वजह से गंगा, गंडक, बागमती और कोसी नदियां उफान पर हैं। गंडक बैराज के सभी गेट खोलने से निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। भागलपुर, नवगछिया, सुपौल और पटना के तटीय इलाकों में तेजी से कटाव हो रहा है, जिससे दर्जनों घर और उपजाऊ जमीनें नदी में समा चुकी हैं। कटाव के कारण हजारों लोग पलायन करने को मजबूर हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य के 11 से अधिक जिलों में अलर्ट जारी करते हुए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को तैनात कर दिया है।
उत्तर प्रदेश: गंगा एक्सप्रेसवे की पोल खुली, टोल प्लाजा पर जलभराव
उत्तर प्रदेश में मानसून का कहर जारी है, जहां प्रयागराज और वाराणसी से लेकर पश्चिमी यूपी तक नदियां उफान पर हैं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्नाव के पास एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा भारी बारिश के कारण धंस गया और टोल प्लाजा के पास भारी जलभराव देखने को मिला। पानी निकासी के लिए ट्यूबवेल पंपों का सहारा लेना पड़ा। वहीं कानपुर और प्रयागराज में गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती सड़कें, श्मशान घाट और निचले मकान पानी में डूब गए हैं। 20 से अधिक गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है और प्रशासन लगातार राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है।
मध्य प्रदेश: चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलतांडव, 400 से ज्यादा दुकानें डूबीं
मध्य प्रदेश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में मानसूनी बारिश ने भयंकर तबाही मचाई है। सतना जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान पर आने से बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। चित्रकूट के रामघाट और आसपास के बाजारों में पानी घुसने से 400 से अधिक दुकानें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। नदी का पानी घटने के बावजूद व्यापारियों और स्थानीय निवासियों की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं, क्योंकि दुकानों और मकानों में 5-5 फीट तक कीचड़ और मलबे की मोटी परत जम गई है। राज्य के 17 से ज्यादा जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी है और नर्मदा, चंबल तथा मंदाकिनी का प्रवाह उग्र बना हुआ है।
प्रशासनिक अलर्ट और बचाव कार्य
मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटों तक इन प्रभावित राज्यों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। केंद्र और राज्य सरकारों ने आपातकालीन नंबर जारी किए हैं और स्थानीय प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। आम लोगों से अपील की गई है कि वे उफनती नदियों, पहाड़ों के संकरे रास्तों और जलभराव वाले इलाकों की ओर रुख न करें।
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