योगी सरकार की नीतियों से बदला मेरठ का स्पोर्ट्स हब, वैश्विक स्तर पर बढ़ी मांग

मेरठ। क्रांति की धरा मेरठ अब पूरी दुनिया में अपनी एक नई पहचान गढ़ रहा है। कभी सिर्फ सीमित स्तर पर क्रिकेट बैट निर्माण के लिए पहचाना जाने वाला यह शहर आज वैश्विक मंच पर देश का सबसे बड़ा ‘स्पोर्ट्स हब’ बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहन और विज़न ने मेरठ की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में नई जान फूंक दी है।

एक समय था जब स्थानीय स्तर पर संसाधनों की कमी, महंगी कच्ची सामग्री और आधुनिक तकनीक के अभाव के कारण यहां के उद्यमी सीमित थे। लेकिन बीते कुछ वर्षों में प्रदेश सरकार की नीतियों और योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से मेरठ का खेल उद्योग 15 से 20 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार के आंकड़े को छू रहा है।

ODOP योजना: संजीवनी साबित हुआ ‘एक जिला-एक उत्पाद’

योगी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना ने मेरठ की खेल सामग्री निर्माण इकाइयों का कायाकल्प कर दिया है। इस योजना के तहत मेरठ के खेल उत्पाद को ब्रांडिंग, मार्केटिंग और वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

  • तकनीकी आधुनिकता पर 50% Subsidy: एमएसएमई और ओडीओपी के तहत नई आधुनिक मशीनरी लगाने पर उद्यमियों को 50 प्रतिशत तक की सरकारी सब्सिडी मिल रही है।
  • ब्याज मुक्त ऋण सहायता: छोटे और मध्यम उद्यमियों को विस्तार के लिए ब्याज मुक्त लोन (Interest-Free Loans) की सुविधा दी गई है। इससे उन सूक्ष्म इकाइयों को सीधा बल मिला है जो धन के अभाव में पुरानी तकनीक पर निर्भर थीं।
  • 4-5 इकाइयों से 7,000 स्पोर्ट्स यूनिट्स तक सफर: सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के चलते मेरठ में पंजीकृत व गैर-पंजीकृत मिलाकर 5,000 से 7,000 छोटी-बड़ी स्पोर्ट्स यूनिट्स कार्यरत हैं।

वैश्विक बाजार में मेरठ का दबदबा: 975 करोड़ से अधिक का निर्यात

मेरठ में बना खेल सामान अब न केवल भारत के हर हिस्से में इस्तेमाल हो रहा है, बल्कि दुनिया के कोने-कोने में इसकी आपूर्ति की जा रही है।

  • निर्यात के आंकड़े: मेरठ से हर साल करीब 975 करोड़ रुपये से अधिक के खेल उत्पादों का सीधा निर्यात अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, फ्रांस, जर्मनी और वेस्टइंडीज़ जैसे देशों में किया जा रहा है।
  • उत्पाद विविधता: क्रिकेट बल्लों और चमड़े की गेंदों से शुरू हुआ सफर अब टेनिस रैकेट, बैडमिंटन, कैरम बोर्ड, एथलेटिक्स उपकरण, जिम्नास्टिक सामान, बॉक्सिंग गियर, स्पोर्ट्स वियर और हाई-टेक फिटनेस उपकरणों तक पहुंच चुका है।
  • प्लास्टिक व फाइबर बैट क्रांति: पर्यावरण संरक्षण और महंगी होती कश्मीरी व इंग्लिश विलो लकड़ी की निर्भरता घटाने के लिए मेरठ में फाइबर और एडवांस प्लास्टिक बैट निर्माण की 50 से अधिक नई यूनिट्स स्थापित की गई हैं। इनकी मांग अब घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बॉक्स-क्रिकेट और टेनिस-बॉल टूर्नामेंट्स में तेजी से बढ़ी है।

महिला सशक्तिकरण और रोजगार के नए अवसर

स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के विस्तार का सीधा लाभ स्थानीय रोजगार को मिला है। सिलाई, पैकेजिंग, ग्रिपिंग, पॉलिशिंग और असेंबलिंग जैसे कार्यों में बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है।

योगी सरकार द्वारा गांव-गांव शुरू किए गए कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों के चलते मेरठ की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में महिलाओं की भागीदारी, जो पहले महज 1% थी, अब बढ़कर 9 से 10 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल और आत्मनिर्भरता के रास्ते खुले हैं।

‘मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय’ से मिला औद्योगिक संबल

मेरठ के सलावा (सरधना) में लगभग 369 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा ‘मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय’ न केवल खिलाड़ियों के लिए वरदान साबित हो रहा है, बल्कि स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के लिए भी एक रिसर्च और टेस्टिंग हब का काम करेगा।

यह उत्तर प्रदेश का पहला और देश का सबसे अत्याधुनिक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट है, जहां 22 ओलंपिक खेलों के प्रशिक्षण और अनुसंधान की सुविधा विकसित की जा रही है। खेल विश्वविद्यालय की स्थापना से अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सामग्री की जांच, स्पोर्ट्स साइंस लैब और उत्पादों के नए मानक तय करने में मदद मिलेगी।

खेलो इंडिया और घरेलू बाजार का प्रोत्साहन

केंद्र सरकार के ‘खैलो इंडिया’ अभियान और प्रदेश सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम ने देश भर में खेल सामानों की खपत में भारी इजाफा किया है। सरकारी स्कूलों, खेल अकादमियों, और स्टेडियमों में इस्तेमाल होने वाली खेल सामग्री का बड़ा हिस्सा सीधे मेरठ से सप्लाई किया जा रहा है।

उद्यमियों का कहना है कि सुधरी हुई कानून व्यवस्था, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी (दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और रैपिड रेल एक्सटेंशन) के कारण माल ढुलाई आसान और सस्ती हुई है, जिससे सप्लाई चेन अधिक मजबूत हुई है। मेरठ की यह सफलता दर्शाती है कि सही नीति और विज़न से कैसे एक पारंपरिक उद्योग अंतरराष्ट्रीय पहचान कायम कर सकता है।

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  • Rahul Kaushik

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