नेपाल-तिब्बत सीमा और हिमालयी क्षेत्रों में आई भयानक जल प्रलय के बाद चीन प्रशासन का सख्त रवैया फिर से चर्चा में है। जिस तरह 2020 में कोरोना महामारी की शुरुआत में वुहान से सच दबाने की खबरें सामने आई थीं, ठीक वही “कोविड वाली ज़ीरो-टॉलरेंस और इंफॉर्मेशन कंट्रोल पॉलिसी” अब इस प्राकृतिक आपदा के दौरान लागू कर दी गई है।
ग्राउंड ज़ीरो से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बत के गिरोंग पोर्ट (Gyirong Port) क्षेत्र में हुए भारी भूस्खलन और तबाही की तस्वीरों या आंकड़ों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वालों के खिलाफ साइबर पुलिस कड़ी कार्रवाई कर रही है। सरकार के आधिकारिक आंकड़ों से इतर मौत का आंकड़ा या जल प्रलय का भयानक वीडियो शेयर करने वालों को सीधे हिरासत और जेल भेजने के आदेश लागू कर दिए गए हैं।
नेपाल और तिब्बत सीमा पर तबाही का मंजर
हिमालयी ग्लेशियर के टूटने और भूस्खलन के बाद आई जल प्रलय ने नेपाल के रसुवा जिले और चीन-शासित तिब्बत के गिरोंग क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। नेपाल में सैकड़ों लोग जान गंवा चुके हैं और हजारों लोग लापता हैं। इस आपदा में त्रिशूली और भोटे कोशी नदियों के तटवर्ती इलाके पूरी तरह बह गए। वहीं, तिब्बत सीमा की तरफ भी निर्माण कार्य में लगे दर्जनों मजदूर, स्थानीय निवासी और तीर्थयात्री बाढ़ की चपेट में आ गए।
आपदा में भी सेंसरशिप: क्या है चीन की “कोविड पॉलिसी”?
कोरोना काल के दौरान चीन पर यह आरोप लगे थे कि उसने संक्रमण से जुड़े आंकड़े छिपाए और सच बोलने वाले डॉक्टरों और नागरिकों पर कार्रवाई की। इस जल प्रलय के बाद भी तिब्बत क्षेत्र में चीन की साइबर सुरक्षा एजेंसी पूरी तरह अलर्ट पर है।
- सूचना पर पूर्ण प्रतिबंध: गिरोंग पोर्ट और आसपास के प्रभावित इलाकों से आम लोगों द्वारा शूट की गई भयानक तस्वीरें और वीडियो क्लिप सोशल मीडिया से हटाए जा रहे हैं।
- आधिकारिक आंकड़ों पर ही मुहर: चीनी अधिकारियों ने तिब्बत में मरने वालों की संख्या बेहद कम बताई है, जबकि जमीनी हकीकत और स्थानीय लोगों के दावों में नुकसान काफी बड़ा बताया जा रहा है।
- जेल और भारी जुर्माने की कार्रवाई: चीनी साइबर पुलिस ने अब तक ऐसे 10 से अधिक मामलों में कड़ी कार्रवाई की है, जहां लोगों ने सोशल मीडिया पर हताहतों की संख्या से जुड़े आंकड़े पोस्ट किए थे।
गलत जानकारी या सच छिपाने की कोशिश?
चीनी प्रशासन का दावा है कि कुछ इंटरनेट यूजर्स “अफवाह फैलाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं और आपदा की गंभीरता को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहे हैं”। चीनी कानून के मुताबिक, आपदा से जुड़ी अनधिकृत या असत्यापित जानकारी फैलाने पर 10 दिनों की प्रशासनिक हिरासत और जुर्माना लग सकता है। वहीं, मामला गंभीर होने पर 3 से 7 साल तक की सख्त जेल की सजा का प्रावधान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तिब्बत चीन के लिए सामरिक और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। वहां के बुनियादी ढांचे, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स या बांधों के टूटने से जुड़े किसी भी सवाल से बचने के लिए चीन अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को बनाए रखना चाहता है। इसी कारण से वह अपने पूरे तंत्र का उपयोग करके किसी भी प्रकार की अनौपचारिक रिपोर्ट को बाहर नहीं आने दे रहा है।