नेपाल में कुदरत का भीषण ढांचा देखने को मिल रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और उसके बाद आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने देश भर में भारी तबाही मचाई है। मध्य और पूर्वी नेपाल के इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। ताज़ा रिपोर्ट्स और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक 919 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,200 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए मृतक संख्या में और वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है।
बाढ़ और भूस्खलन के कारण राजधानी काठमांडू सहित देश के कई मुख्य राजमार्ग और सड़कों का संपर्क टूट चुका है। नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिससे सैकड़ों गांव और शहरी बस्तियां पानी में डूब गई हैं। पानी के तेज़ बहाव में कई पुल बह गए हैं और सड़कों के कट जाने से राहत एवं बचाव कार्यों में भारी बाधा आ रही है। सुरक्षा बल, सेना, पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवक चौबीसों घंटे बचाव अभियानों में जुटे हुए हैं, लेकिन दुर्गम इलाकों और लगातार हो रही बारिश के कारण फंसे हुए लोगों तक पहुँचना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
आपदा के कारण सैकड़ों शव ऐसे मिले हैं जिनकी शिनाख्त नहीं हो पा रही है। स्थिति की गंभीरता और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने सामूहिक रूप से शवों को दफनाने के लिए सैकड़ों कब्रें तैयार करवाई हैं। अस्पतालों के शवगृह (मर्च्युरी) पूरी तरह भर चुके हैं और सड़ते शवों के कारण बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है, जिसे देखते हुए प्रशासन को यह कठिन फैसला लेना पड़ा है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में बेघर हुए हजारों लोग तिरपालों और अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। पीने के स्वच्छ पानी, भोजन और बुनियादी दवाओं की भारी किल्लत पैदा हो गई है। बाढ़ के मलबे और दूषित पानी की वजह से जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) के फैलने का जोखिम भी मंडरा रहा है। नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और राहत एजेंसियों से आपातकालीन सहायता की अपील की है ताकि प्रभावित आबादी तक खाद्य सामग्री, चिकित्सा उपकरण और राहत किट जल्द से जल्द पहुँचाए जा सकें।
स्थानीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मानसूनी हवाओं के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। प्रशासन ने निचले और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की हिदायत दी है। नेपाल में आई यह बाढ़ हाल के वर्षों की सबसे भयानक त्रासदियों में से एक मानी जा रही है, जिससे उबरने में देश को लंबा समय और भारी संसाधनों की आवश्यकता होगी।