हिमालय की वादियों में कुदरत का कहर एक बार फिर भयानक तबाही लेकर आया है। नेपाल के सीमावर्ती जिलों और तिब्बत के ऊंचे इलाकों से उठी भयानक फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है। इस कुदरती आपदा में अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आपदा की इस घड़ी में भारत ने दरियादिली और पड़ोसी धर्म निभाते हुए तुरंत राहत सामग्री की पहली खेप नेपाल भेजी है। वहीं दूसरी ओर, नेपाल से आने वाली नदियों के उफान पर होने के कारण भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
कैसे आई यह भयानक बाढ़?
वैज्ञानिकों और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह तबाही तिब्बत (चीन) के सीमावर्ती क्षेत्र में हुए हिमस्खलन और भूस्खलन के बाद भोटे कोशी (Bhote Koshi) नदी में आए अचानक उफान की वजह से हुई है।
नेपाल के रसुवा (Rasuwa) जिले से शुरू हुई इस बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका तक नहीं मिला। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई इस बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग (Dhading) जैसे मध्य नेपाल के जिलों में भारी तबाही मचाई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में 4-4 मंजिल ऊंची इमारतें, गाड़ियां, और पक्के पुल ताश के पत्तों की तरह नदी के तेज बहाव में बहते हुए साफ देखे जा सकते हैं।
तबाही का आंकड़ा: 160 से अधिक मौतें और सैकड़ों लापता
नेपाल पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक:
- मृतकों की संख्या: अब तक 160 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं।
- लापता लोग: 500 से 750 के बीच लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में पर्यटक, स्थानीय निवासी और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
- भारतीयों की स्थिति: लापता लोगों में 133 से अधिक भारतीय नागरिक और 37 प्रवासी भारतीय (NRI) शामिल बताए जा रहे हैं, जो कैलास मानसरोवर यात्रा या अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा पर थे।
- अवसंरचना को नुकसान: करीब 13 जलविद्युत परियोजनाएं (Hydropower Projects) क्षतिग्रस्त हुई हैं और रसुवागढ़ी के पास चीन-नेपाल सीमा को जोड़ने वाली कई प्रमुख सड़कें और पुल पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।

भारत ने निभाया पड़ोसी धर्म: भेजी राहत सामग्री की पहली खेप
नेपाल में आई इस आपदा के तुरंत बाद भारत सरकार ने बिना समय गंवाए मदद का हाथ बढ़ाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से फोन पर बात कर इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और भारत की ओर से हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के अनुसार, भारत ने भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) सामग्री की पहली खेप काठमांडू भेज दी है। इसमें टेंट, दवाइयां, रेडी-टू-ईट भोजन और आपातकालीन चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।
इसके अलावा, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने बाढ़ से प्रभावित भारतीयों और उनके परिजनों के लिए 24/7 आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:
- +977 985 131 6807
- +977 970 910 7500
उत्तर प्रदेश और बिहार में हाई अलर्ट
नेपाल में नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने से भारत के मैदानी इलाकों में भी बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। नेपाल से निकलने वाली नदियां (जैसे गंडक, कोसी, घाघरा और राप्ती) उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों से होकर गुजरती हैं।
| राज्य | प्रभावित/संवेदनशील क्षेत्र | प्रशासनिक तैयारी |
| उत्तर प्रदेश | महराजगंज, कुशीनगर, गोरखपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी | एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ की टीमों की तैनाती, तटबंधों की निगरानी तेज। |
| बिहार | पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सुपौल, मधुबनी | वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के गेटों पर चौबीसों घंटे निगरानी, निचले इलाकों को खाली कराने की चेतावनी। |
बिहार के जल संसाधन विभाग और यूपी के आपदा प्रबंधन विभाग ने सीमावर्ती इलाकों के निवासियों को नदियों के पास न जाने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है।
राहत और बचाव कार्य जारी
नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। सेना ने 12 से अधिक हेलीकॉप्टरों को दुर्गम इलाकों से लोगों को एयरलिफ्ट करने के लिए तैनात किया है। हालांकि, कई इलाकों में सड़कों और संचार नेटवर्क के पूरी तरह ठप हो जाने के कारण बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और अचानक होने वाली अतिवृष्टि (Cloudbursts) ऐसी घटनाओं को लगातार बढ़ावा दे रही हैं, जिसके लिए दीर्घकालिक नीति और पर्यावरण संरक्षण की सख्त जरूरत है।