राष्ट्रमंडल खेल: ‘सिर्फ नीरज चोपड़ा ही नहीं, हमारे पास पदक के कई मजबूत दावेदार’ — अंजू बॉबी जॉर्ज

नई दिल्ली: विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत के लिए ऐतिहासिक पदक जीतने वाली पूर्व दिग्गज एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज का मानना है कि आगामी राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में भारत का ध्यान केवल नीरज चोपड़ा तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भले ही ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा भाला फेंक (Javelin Throw) में भारत के सबसे बड़े और प्रमुख चेहरे हैं, लेकिन इस बार भारतीय एथलेटिक्स दल में ऐसे कई अन्य शानदार एथलीट भी मौजूद हैं जो देश के लिए पदक जीतने के पूरे दावेदार हैं।

अंजू बॉबी जॉर्ज, जो वर्तमान में भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) की वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं, ने एक हालिया साक्षात्कार में भारतीय खेल जगत के बदलते परिदृश्य और एथलीटों के बढ़ते आत्मविश्वास पर विस्तार से बात की। उनके अनुसार, भारतीय एथलेटिक्स अब एक ऐसे दौर में पहुंच चुका है जहां खिलाड़ी केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए नहीं जाते, बल्कि पोडियम फिनिश (पदक तालिका) को अपना लक्ष्य बनाकर मैदान में उतरते हैं।

नीरज चोपड़ा का प्रभाव और उससे आगे की सोच

अंजू बॉबी जॉर्ज ने नीरज चोपड़ा की ऐतिहासिक सफलताओं की सराहना करते हुए कहा कि नीरज ने भारतीय खेलों की मानसिकता में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया है। उन्होंने यह साबित किया है कि वैश्विक स्तर पर सर्वोच्च पायदान हासिल करना भारतीय खिलाड़ियों के लिए भी पूरी तरह संभव है।

पदक के अन्य प्रमुख दावेदार: भारत की उभरती ताकत

भारतीय दल की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए अंजू बॉबी जॉर्ज ने उन विभिन्न स्पर्धाओं (Events) पर प्रकाश डाला जिनमें भारत पदक का मजबूत दावेदार बनकर उभरा है:

  • भाला फेंक में दूसरा स्तंभ (जवेलिन थ्रो): नीरज के अलावा किशोर जेना और डीपी मनु जैसे अन्य भाला फेंक एथलीटों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में इनके हालिया थ्रो इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अब इस स्पर्धा में एक वैश्विक सुपरपावर बन चुका है।
  • ट्रिपल जंप (Triple Jump): पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने ट्रिपल जंप में ऐल्डहॉस पॉल और अब्दुल्ला अबूबकर की बदौलत ऐतिहासिक स्वर्ण और रजत पदक जीता था। प्रवीण चित्रवेल जैसे युवा खिलाड़ियों की मौजूदगी में यह वर्ग भारत के लिए फिर से दोहरे पदक की उम्मीद जगाता है।
  • लंबी कूद (Long Jump): मुरली श्रीशंकर और शैली सिंह जैसी प्रतिभाओं ने लंबी कूद में लगातार 8 मीटर से अधिक के थ्रो और प्रदर्शन से वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। शैली सिंह, जिन्हें खुद अंजू और उनके पति रॉबर्ट बॉबी जॉर्ज का मार्गदर्शन प्राप्त है, देश के लिए एक बड़ी पदक उम्मीद के रूप में उभर रही हैं।
  • पैदल चाल (Race Walking): प्रियंका गोस्वामी और अक्षदीप सिंह जैसे एथलीटों ने पैदल चाल में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने की उनकी संभावना बेहद प्रबल है।
  • मध्यम और लंबी दूरी की दौड़: 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में अविनाश साबले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के साथ लिया जाता है। विश्व स्तरीय केन्याई और इथियोपियाई धावकों को कड़ी टक्कर देने का उनका ट्रैक रिकॉर्ड उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों में पदक का सबसे बड़ा दावेदार बनाता है।

बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक प्रशिक्षण का योगदान

भारत में एथलेटिक्स के इस स्वर्णिम दौर का श्रेय अंजू बॉबी जॉर्ज ने खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) के संयुक्त प्रयासों को दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एथलीटों को अब समय पर अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र (अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलने का मौका), विदेशी कोचों की सेवाएं, अत्याधुनिक फिजियोथेरेपी और खेल विज्ञान (Sports Science) का समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, एथलीटों की वित्तीय सहायता के लिए शुरू की गई ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) ने खिलाड़ियों को अपनी तैयारी पर पूरा ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाया है।

बदलती मानसिकता: भागीदारी नहीं, अब जीत ही एकमात्र लक्ष्य

अंजू ने अपने खेल के दिनों को याद करते हुए एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा किया। “हमारे समय में, अंतरराष्ट्रीय पदक जीतना एक दुर्लभ घटना माना जाता था और बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी होती थी। लेकिन आज का युवा एथलीट किसी भी मानसिक दबाव के बिना मैदान पर उतरता है। वे किसी भी देश के खिलाड़ी से डरते नहीं हैं। यह आत्मविश्वास ही नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है।”

उन्होंने कहा कि जब एथलीटों को यह अहसास होता है कि उनके साथ पूरा देश खड़ा है और उनके पास दुनिया का सबसे अच्छा प्रशिक्षण ढांचा उपलब्ध है, तो उनका प्रदर्शन स्वतः ही निखर जाता है।

निष्कर्ष

अंजू बॉबी जॉर्ज का यह बयान भारतीय खेल प्रेमियों के लिए एक सकारात्मक और नई दृष्टि प्रदान करता है। बेशक, नीरज चोपड़ा जब भी मैदान में उतरते हैं, पूरे देश की निगाहें उन पर टिकी होती हैं और उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीदें होती हैं। लेकिन इस बार का राष्ट्रमंडल खेल यह साबित करने का भी अवसर होगा कि भारतीय एथलेटिक्स केवल एक नाम के भरोसे नहीं चल रहा है, बल्कि यह एक संपूर्ण और मजबूत दल बन चुका है।

एथलेटिक्स में भारत की बहुआयामी सफलता यह दर्शाती है कि आगामी राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ी न केवल पदकों की संख्या में बढ़ोतरी करेंगे, बल्कि कई नई स्पर्धाओं में देश का नाम रोशन करेंगे।

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