विश्वविद्यालय परिसर के मुख्य सभागार में आज एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ‘ब्रिटिश एंड अमेरिकन ड्रामा’ (British and American Drama) नामक पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय के विद्वान प्राध्यापकों और वरिष्ठ शोधकर्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई यह पुस्तक अंग्रेजी साहित्य के विद्यार्थियों, विशेषकर नाट्यशास्त्र और रंगमंच में रुचि रखने वाले शोधार्थियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण कृति मानी जा रही है। लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विश्वविद्यालय के कुलपति ने पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, वरिष्ठ प्रोफेसर, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
कुलपति ने जताई प्रसन्नता, कहा—”अंग्रेजी साहित्य के अध्ययन को मिलेगी नई दिशा”
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति ने पुस्तक के लेखकों और संपादकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य साहित्य में ब्रिटिश और अमेरिकन ड्रामा का इतिहास बेहद समृद्ध और प्रभावकारी रहा है, लेकिन भाषा की जटिलता और संदर्भों की भिन्नता के कारण भारतीय छात्रों को इसे गहराई से समझने में अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
कुलपति ने अपने वक्तव्य में कहा, “यह पुस्तक छात्रों को नाटक और रंगमंच की सैद्धांतिक और व्यावहारिक बारीकियों को सरलता से समझने में मदद करेगी। शेक्सपियर, मार्लो और बर्नार्ड शॉ के शास्त्रीय ब्रिटिश नाटकों से लेकर आर्थर मिलर, यूजीन ओ’नील और टेनेसी विलियम्स के आधुनिक अमेरिकन नाटकों तक का सफर इस पुस्तक में जिस सहजता से पिरोया गया है, वह सराहनीय है। यह केवल एक पाठ्यपुस्तक नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच और विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।”
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विश्वविद्यालय प्रशासन हमेशा ऐसी अकादमिक पहलों का समर्थन करता रहेगा जो विद्यार्थियों के ज्ञान के दायरे को बढ़ाएं और उन्हें वैश्विक स्तर की अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएं।
पुस्तक की मुख्य विशेषताएं और विषय वस्तु
‘ब्रिटिश एंड अमेरिकन ड्रामा’ पुस्तक को विशेष रूप से स्नातकोत्तर (MA) और स्नातक (BA) स्तर के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पुस्तक के संपादकीय मंडल ने जानकारी दी कि इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं का समावेश किया गया है:
- ब्रिटिश नाटकों का ऐतिहासिक विकास: एलिज़ाबेथन युग से लेकर रिस्टोरेशन ड्रामा, विक्टोरियन काल और 20वीं सदी के आधुनिक ब्रिटिश रंगमंच के क्रमिक विकास का विस्तृत वर्णन।
- अमेरिकन ड्रामा का उदय और प्रभाव: 19वीं और 20वीं शताब्दी में अमेरिकी समाज, महामंदी (Great Depression), और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी नाटकों में आए सामाजिक व मनोवैज्ञानिक बदलावों का गहन विश्लेषण।
- प्रमुख नाट्य शैलियों की व्याख्या: ‘थिएटर ऑफ द एब्सर्ड’ (Theatre of the Absurd), ट्रेजेडी, कॉमेडी ऑफ मैनर्स, और एक्सप्रेशनिज्म जैसी प्रमुख नाट्य शैलियों को सरल भाषा में समझाया गया है।
- मुख्य कृतियों का आलोचनात्मक अध्ययन: प्रमुख ब्रिटिश और अमेरिकन नाटककारों की कालजयी रचनाओं का विषय-वार और चरित्र-वार विस्तृत विश्लेषण शामिल है, जो परीक्षा की दृष्टि से छात्रों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा।
साहित्यिक एवं रंगमंच विशेषज्ञ बोले—”विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर”
अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष ने स्वागत भाषण में कहा कि वर्तमान समय में अंतर्राष्ट्रीय साहित्य को समझने के लिए प्रामाणिक और सुलभ पाठ्य सामग्री की अत्यंत आवश्यकता है। बाज़ार में उपलब्ध अधिकतर विदेशी पुस्तकें अत्यधिक महंगी और कठिन भाषा में होती हैं, जिन्हें समझ पाना सामान्य छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। यह नई पुस्तक न केवल किफायती है, बल्कि इसकी भाषा भी सरल, स्पष्ट और सुबोध है।
कार्यक्रम में उपस्थित रंगमंच के वरिष्ठ विशेषज्ञों और समीक्षकों ने भी पुस्तक की सराहना की। उनका मानना है कि एक अच्छा नाटक केवल पन्नों पर पढ़ी जाने वाली कहानी नहीं होता, बल्कि वह मंच पर जीवंत होने वाली सामाजिक संरचना का प्रतिबिंब होता है। इस पुस्तक में नाटकों के पाठ्य रूप (Textual form) के साथ-साथ उनके मंचन (Performance/Stagecraft) के पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया है, जिससे छात्रों को यह समझने में आसानी होगी कि कोई लिखित संवाद मंच पर जाकर किस प्रकार जीवंत होता है।
छात्रों में उत्साह का माहौल
पुस्तक लोकार्पण के बाद कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखा गया। शोधार्थियों और छात्रों का कहना था कि ब्रिटिश और अमेरिकन साहित्य की बारीकियों को समझने के लिए उन्हें अब अलग-अलग संदर्भ पुस्तकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एक ही स्थान पर दोनों देशों की नाट्य परंपराओं का ऐसा व्यवस्थित और प्रामाणिक संकलन मिलना उनके अध्ययन और आगामी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहद लाभकारी रहेगा।
समारोह के अंत में पुस्तक के लेखकों को कुलपति द्वारा स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस सफल अकादमिक कार्यक्रम का समापन हुआ।
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