देश में चीनी और खाद्य पदार्थों की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार और उसकी E20 (इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल) नीति पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की इस नीति के तहत बड़े पैमाने पर गन्ने और अनाज का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में किया जा रहा है, जिससे घरेलू बाजार में चीनी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की किल्लत हो गई है और कीमतें आसमान छू रही हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सरकार की इस नीति को “दूरदर्शिता से रहित और जनविरोधी” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले से देश की आम जनता पर दोहरी मार पड़ रही है—एक तरफ रसोई का बजट बिगड़ रहा है, तो दूसरी तरफ सड़क पर गाड़ियों के रखरखाव और माइलेज का खर्च बढ़ रहा है।
‘गन्ना इथेनॉल में गया, इसलिए महंगी हुई चीनी’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 25 लाख टन चीनी-लायक गन्ने का डायवर्जन इथेनॉल बनाने के लिए कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप केवल तीन महीनों के भीतर चीनी के दाम लगभग ₹48 प्रति किलो से बढ़कर ₹67 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा, गुड़ के दाम भी ₹50 से बढ़कर ₹65 प्रति किलो हो गए हैं।
जयराम रमेश का कहना है कि गन्ने के अलावा मक्का और चावल जैसे अनाजों का उपयोग भी इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए किया जा रहा है। इसके चलते चावल की कीमतों में 16% और मक्के के आटे में 11% तक की तेजी दर्ज की गई है। अनाज का उप-उत्पाद कम होने की वजह से पशु आहार के दाम भी 10% से अधिक बढ़ गए हैं, जिसका सीधा असर दूध और अन्य डेयरी उत्पादों पर पड़ रहा है।
ईंधन नीति पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस ने न केवल महंगाई बल्कि E20 ईंधन की गुणवत्ता और पेट्रोल के दामों पर भी केंद्र सरकार को घेरा है। जयराम रमेश ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने और पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाए जाने से लागत कम हुई है, लेकिन इसका फायदा आम जनता को पेट्रोल के दाम घटाकर नहीं दिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन वाहनों का इंजन E20 फ्यूल के अनुकूल नहीं है, उनमें माइलेज में गिरावट आ रही है और इंजन खराब होने का जोखिम बढ़ गया है। कांग्रेस का दावा है कि इथेनॉल उद्योग से जुड़े कॉर्पोरेट मित्रों को लाभ पहुंचाने के चक्कर में वाहन चालकों के पास कोई अन्य विकल्प नहीं छोड़ा गया है।
विपक्ष की मांगें और सरकार का रुख
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने E20 नीति की तत्काल समीक्षा की मांग उठाई है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को बिना इथेनॉल वाले सामान्य पेट्रोल का विकल्प भी उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराना चाहिए।
दूसरी तरफ, बढ़ते दबाव और चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने आपात कदम उठाते हुए ज़ीरो ड्यूटी (शुल्क-मुक्त) पर 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर (कच्ची चीनी) के आयात की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट भी लागू की गई है। वहीं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन का गहन परीक्षण किया गया है और गाड़ियों का माइलेज केवल ईंधन पर नहीं बल्कि ड्राइविंग आदतों, वाहन के रखरखाव और ट्रैफिक स्थितियों पर निर्भर करता है।
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