शिक्षक पर छात्रों से ‘बैड टच’ और अभद्रता का आरोप: मेरठ में डीएम के आदेश पर जांच शुरू

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक विद्यालय के शिक्षक पर छात्राओं ने असभ्य व्यवहार और ‘बैड टच’ (असुरक्षित स्पर्श) के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला संज्ञान में आते ही जिले के प्रशासनिक और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। मेरठ के जिलाधिकारी (डीएम) ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। इस घटना के बाद से स्थानीय अभिभावकों और क्षेत्रवासियों में भारी रोष का माहौल है, वहीं पुलिस और प्रशासनिक टीम ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना मेरठ के एक स्थानीय स्कूल की है। आरोप है कि संबंधित शिक्षक लंबे समय से विद्यालय की नाबालिग छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार कर रहा था। छात्राओं ने आपबीती बताते हुए आरोप लगाया कि कक्षा के दौरान और अकेले मिलने पर शिक्षक उनके साथ अभद्रता करता था तथा ‘बैड टच’ की कोशिश करता था। जब छात्राओं ने इसका विरोध किया, तो उन्हें कम अंक देने और परीक्षा में फेल करने की धमकियां दी गईं। डर के मारे काफी समय तक छात्राएं शांत रहीं, लेकिन शिक्षक की बढ़ती हरकतों से तंग आकर आखिरकार कुछ छात्राओं ने साहस दिखाया और पूरी बात अपने परिजनों को बताई।

छात्राओं के परिजनों को जब इस शर्मनाक हरकत की भनक लगी, तो उनके होश उड़ गए। क्रोधित अभिभावक तुरंत एकजुट होकर स्कूल परिसर पहुंचे और आरोपी शिक्षक के खिलाफ जमकर हंगामा किया। स्कूल प्रशासन पर भी मामले को दबाने और आरोपी को बचाने के प्रयास के आरोप लगे हैं, जिससे अभिभावकों का गुस्सा और भड़क गया।

डीएम का कड़ा रुख, जांच समिति गठित

मामले की खबर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचते ही हड़कंप मच गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए मेरठ के जिलाधिकारी ने बिना किसी देरी के मामले का संज्ञान लिया। डीएम ने पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

प्रशासन द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और पुलिस विभाग के संयुक्त नेतृत्व में एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद स्कूल जाकर मामले की पूरी पड़ताल करें, पीड़िता छात्राओं का बयान दर्ज करें और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जल्द से जल्द सौंपें। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो आरोपी शिक्षक के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई की जाएगी, बल्कि पॉक्सो (POCSO) एक्ट जैसी कड़ी कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा जाएगा।

अभिभावकों में गहरा रोष, सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना के बाद से ही क्षेत्र के अभिभावकों में भय और भारी नाराजगी का माहौल है। परिजनों का कहना है कि जिस गुरु को समाज में माता-पिता से भी ऊंचा दर्जा दिया जाता है और जिसके भरोसे बच्चों को स्कूल भेजा जाता है, यदि वही भक्षक बन जाए तो बच्चे कहां सुरक्षित रहेंगे?

अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूल प्रशासन ऐसे संदिग्ध चरित्र वाले शिक्षकों की तुरंत पहचान करे और उनके खिलाफ कड़ा एक्शन ले। इसके साथ ही, कई स्थानीय संगठनों और महिला सुरक्षा कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है और आरोपी शिक्षक के खिलाफ बिना किसी पक्षपात के कठोरतम कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

स्कूलों में बाल सुरक्षा पर उठे गंभीर प्रश्न

मेरठ की इस घटना ने एक बार फिर शिक्षण संस्थानों में बाल सुरक्षा प्रणाली (Child Safety Policy) और पोश (POSH/POCSO) गाइडलाइंस के कड़ाई से पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही काफी नहीं है, बल्कि स्कूलों के भीतर एक ऐसा सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल होना चाहिए जहां बच्चे बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें।

इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने अत्यंत आवश्यक हैं:

  • सीसीटीवी (CCTV) निगरानी: स्कूल के हर कोने, गलियारों और कक्षाओं में चालू सीसीटीवी कैमरे होना अनिवार्य होना चाहिए।
  • सहानुभूतिपूर्ण शिकायत निवारण: हर स्कूल में एक बाल सुरक्षा समिति होनी चाहिए, जहां बच्चे बिना किसी झिझक के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
  • अवेयरनेस सेशन: बच्चों को नियमित रूप से ‘गुड टच और बैड टच’ के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए ताकि वे सही और गलत का अंतर समझ सकें।
  • बैकग्राउंड वेरिफिकेशन: किसी भी शिक्षक या कर्मचारी की नियुक्ति से पूर्व उनका कड़ा चरित्र और पुलिस सत्यापन (Police Verification) अनिवार्य किया जाना चाहिए।

आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया?

फिलहाल, जांच टीम छात्राओं, उनके परिजनों और स्कूल के अन्य स्टाफ के बयान दर्ज कर रही है। पुलिस बाल कल्याण समिति (CWC) के सहयोग से पीड़ित छात्राओं की काउंसलिंग कराने की भी तैयारी कर रही है ताकि वे किसी मानसिक तनाव से गुजरने के बजाय खुलकर अपनी बात रख सकें। जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपी शिक्षक के निलंबन और कानूनी गिरफ्तारी की कार्रवाई तय मानी जा रही है।

प्रशासन ने आम जनता और अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि न्याय प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी और आरोपी के खिलाफ ऐसी मिसाल कायम की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा नीच कृत्य करने की हिम्मत न कर सके।

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