पुणे के ऐतिहासिक सिंहगढ़ किले पर पहनावे को लेकर पर्यटकों के साथ हाथापाई और ‘मोरल पुलिसिंग’ (नैतिक पहरेदारी) की एक गंभीर घटना सामने आई है। दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े सदस्यों द्वारा शॉर्ट्स पहनने पर एक परिवार और अन्य पर्यटकों पर हमला किए जाने के बाद, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने किले में प्रवेश को नियंत्रित (रगुलेट) करने और सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने का फैसला लिया है।
घटना का विवरण और विवाद का कारण
पुणे के पास स्थित प्रसिद्ध सिंहगढ़ किले में मानसून के मौसम के दौरान भारी संख्या में पर्यटक पहुंचे थे। इसी दौरान एक पर्यटक परिवार के साथ आई आठ वर्षीय बच्ची और कुछ अन्य पर्यटकों के हाफ पैंट (शॉर्ट्स) और बिना आस्तीन के कपड़े पहनने पर दक्षिणपंथी संगठन ‘समस्त हिंदू बांधव आर्मी’ के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई।
यह घटना छत्रपति शिवाजी महाराज के पराक्रमी सेनापति नरवीर तानाजी मालुसरे की समाधि के पास हुई। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने पर्यटकों से संस्कृति और परंपरा का हवाला देते हुए तीखी बहस शुरू कर दी। बहस इतनी बढ़ गई कि कार्यकर्ताओं ने पर्यटकों के साथ मारपीट की, धक्के मारे और जबरन किला छोड़ने के लिए दबाव बनाया। पीड़ित परिवार की शिकायत के अनुसार, हमलावरों ने यह कहते हुए मारपीट की कि “क्या आपको हिंदू संस्कृति की समझ नहीं है?”
कानूनी कार्रवाई
घटना के बाद धायरी निवासी अवधूत पांडुरंग पाटिल (39) ने हवेली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया। हवेली पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए आठ आरोपियों (जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—जैसे स्वेच्छा से चोट पहुंचाना, अवैध रूप से इकट्ठा होना, दंगा करना और आपराधिक धमकी—के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की है।

प्रशासन की सख्त पहल: पर्यटकों के प्रवेश का नियमन
इस अप्रिय घटना और भारी भीड़ के कारण पैदा होने वाली सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए पुणे वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए हैं:
- क्षमता आधारित प्रवेश प्रणाली: वन विभाग अब सिंहगढ़ किले पर पर्यटकों की सुरक्षित क्षमता को ध्यान में रखकर ही प्रवेश की अनुमति देगा। सुरक्षित सीमा से अधिक भीड़ होने पर मुख्य द्वार पर ही वाहनों और पर्यटकों को रोका जाएगा।
- सुरक्षा बलों की तैनाती: ऐतिहासिक स्थलों और उच्च फुटफॉल (अत्यधिक भीड़) वाले बिंदुओं पर सुरक्षाकर्मियों और वन रक्षकों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
- ऐप-आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग: प्रशासन एक विशेष मोबाइल ऐप और एआई (AI) कैमरों की मदद से भीड़ के स्तर की निगरानी करेगा। पर्यटकों को भी ऐप के माध्यम से किले पर वर्तमान भीड़ की स्थिति की जानकारी पहले से मिल सकेगी।
- मोरल पुलिसिंग पर रोक: प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐतिहासिक विरासत स्थलों की सुरक्षा और पर्यटकों की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। किसी भी अनाधिकृत समूह द्वारा पर्यटको के साथ दुर्व्यवहार या ‘मोरल पुलिसिंग’ करने पर सख्त कार्रवाई होगी।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सिंहगढ़ न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि यह महाराष्ट्र की ऐतिहासिक विरासत और आस्था का प्रतीक है। ऐसे में यहां आने वाले हर नागरिक और पर्यटक की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।
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