अक्सर कहा जाता है कि बेंगलुरु केवल सूचना प्रौद्योगिकी (IT) का गढ़ ही नहीं है, बल्कि यह अवसरों का शहर भी है। इस बात को एक बार फिर बेंगलुरु के एक कॉलेज छात्र ने सच कर दिखाया है। अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने और वित्तीय स्वतंत्रता हासिल करने के उद्देश्य से इस छात्र ने पार्ट-टाइम के रूप में रैपिडो (Rapido) बाइक टैकसी चलाने का फैसला किया। मात्र तीन महीनों की मेहनत के बाद जब छात्र ने अपनी कुल कमाई और खर्चों का हिसाब सोशल मीडिया पर साझा किया, तो यह तेजी से वायरल हो गया।
छात्र ने बताया कि उसने इन 90 दिनों के दौरान पढ़ाई से बचे हुए समय में काम करके कुल 65,000 रुपये की कमाई की। अपने इस अनुभव को साझा करते हुए उसने केवल अपनी सफलता की कहानी ही नहीं बताई, बल्कि पेट्रोल के खर्च, ऐप के कमीशन, रखरखाव (Maintenance) और असल मुनाफे (Net Profit) का पूरा ब्योरा भी सार्वजनिक किया है।
कैसे शुरू हुआ पार्ट-टाइम राइडिंग का सफर?
बेंगलुरु जैसे महानगर में रहना और पढ़ाई करना काफी खर्चीला माना जाता है। हॉस्टल की फीस, खाने-पीने का खर्च, स्टेशनरी और निजी जरूरतों के लिए छात्र अक्सर अपने माता-पिता पर निर्भर रहते हैं। हालांकि, इस युवा छात्र ने अपने खाली समय का सदुपयोग करने की सोची। बेंगलुरु में ट्रैफिक की भारी समस्या को देखते हुए बाइक टैक्सी (Rapido) की मांग हमेशा बहुत ज्यादा रहती है।
छात्र ने अपनी दैनिक कक्षाओं के खत्म होने के बाद शाम के समय और वीकेंड्स (शनिवार और रविवार) को राइड्स स्वीकार करना शुरू किया। उसने अपने समय का प्रबंधन इस तरह किया कि उसकी पढ़ाई पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। वह शाम को 4-5 घंटे और छुट्टियों के दिनों में 7-8 घंटे बाइक चलाता था।
3 महीने की कमाई और खर्च का पूरा हिसाब
सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए ब्योरे के अनुसार, छात्र ने अपनी पूरी वित्तीय यात्रा को बहुत ही पारदर्शी तरीके से समझाया है:
- कुल कमाई (Gross Revenue): 3 महीने में लगभग 65,000 रुपये।
- ईंधन (Petrol) का खर्च: रोजाना की राइड्स के हिसाब से पेट्रोल में लगभग 18,000 से 20,000 रुपये खर्च हुए।
- बाइक मेंटेनेंस और सर्विसिंग: लगातार बाइक चलाने के कारण मोबिल ऑयल बदलना, ब्रेक पैड और टायर की देखभाल में करीब 4,000 रुपये लगे।
- प्लेटफॉर्म कमीशन: रैपिडो ऐप द्वारा काटे गए कमीशन और अन्य शुल्कों के बाद छात्र के पास लगभग 38,000 से 40,000 रुपये का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) बचा।
छात्र के मुताबिक, हालांकि पेट्रोल और मेंटेनेंस का खर्च कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा ले लेता है, फिर भी एक छात्र के लिए हर महीने औसतन 12,000 से 13,000 रुपये की बचत होना बहुत बड़ी बात है।
राइडर के तौर पर मिले अनुभव और चुनौतियां
अपने अनुभव साझा करते हुए छात्र ने बताया कि यह सफर सिर्फ पैसे कमाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इससे उसे जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक भी मिले।
1. ट्रैफिक और मौसम की मार:
बेंगलुरु का ट्रैफिक पूरे देश में मशहूर है। घंटों जाम में फंसे रहना, सिल्क बोर्ड या आउटर रिंग रोड जैसे इलाकों में बाइक चलाना बेहद थकाऊ काम होता है। इसके अलावा, अचानक होने वाली बारिश और चिलचिलाती धूप में बाइक चलाना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण था।
2. विविध लोगों से मुलाकात:
छात्र ने बताया कि 3 महीने के दौरान उसने सैकड़ों यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाया। इनमें आईटी पेशेवर, कॉलेज के अन्य छात्र, पर्यटक और बुजुर्ग शामिल थे। कई बार यात्रियों के साथ होने वाली बातचीत से उसे कॉरपोरेट वर्ल्ड, टेक्नोलॉजी और जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानने का मौका मिला।
3. व्यवहारिक ज्ञान और समय प्रबंधन:
पढ़ाई के साथ-साथ राइडिंग करने से छात्र ने टाइम मैनेजमेंट (समय प्रबंधन) सीखा। उसे यह समझ आया कि कब, किस इलाके में राइड्स ज्यादा मिलती हैं और पिक-आवर्स (Peak Hours) का फायदा कैसे उठाया जाता है।
सोशल मीडिया पर मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया
जब इस छात्र ने अपनी इस यात्रा और वित्तीय गणित का पूरा विवरण रेडिट और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया, तो नेटिजन्स ने उसकी जमकर तारीफ की। लोगों ने उसकी मेहनत, ईमानदारी और अपने पैरों पर खड़े होने के जज्बे को सराहा।
कई अन्य युवाओं और छात्रों ने इस पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि विदेशों में छात्रों द्वारा पार्ट-टाइम काम करना एक सामान्य बात है, लेकिन भारत में भी अब यह संस्कृति धीरे-धीरे अपनी जगह बना रही है। किसी भी काम को छोटा न समझते हुए अपनी मेहनत से पैसे कमाना सम्मान की बात है।
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