नदी किनारे जल लेने गई थी मां ग्रामीण इलाकों में नदियों और जलाशयों के पास रहने वाले लोगों के लिए जीवन जितना शांत नजर आता है, उतना ही यह खतरे से भरा होता है। प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भरता कभी-कभी किसी परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ तोड़ देती है, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं हो पाती। एक अत्यंत हृदयविदारक घटना में एक मां की आंखों के सामने उसका मासूम बच्चा पानी में समा गया और वह असहाय होकर सिर्फ चीखती-चिल्लाती रह गई। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल है और हर किसी का कलेजा इस भयानक दृश्य को सुनकर कांप उठा है।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, महिला रोजाना की तरह नदी के तट पर पानी भरने या घरेलू काम के सिलसिले में आई थी। उसका छोटा बच्चा भी उसके साथ किनारे पर खेल रहा था। सुबह का समय था और सब कुछ बेहद सामान्य लग रहा था। बच्चा नदी के पानी के बिल्कुल करीब तट पर बैठा हुआ था। मां का ध्यान कुछ पलों के लिए दूसरी तरफ गया, और इसी बीच पानी की खामोशी एक अचानक हुए हमले में बदल गई।
पलक झपकत ही हुआ खूनी हमला नदी के शांत दिखने वाले पानी के नीचे घात लगाकर बैठा एक विशालकाय मगरमच्छ अचानक बाहर आया। इससे पहले कि बच्चा या उसकी मां कुछ समझ पाते, मगरमच्छ ने बिजली की गति से अपने मजबूत जबड़ों में मासूम को जकड़ लिया। बच्चे की चीख सुनकर मां तुरंत उसकी तरफ भागी, लेकिन मगरमच्छ पलक झपकते ही बच्चे को गहरे पानी की ओर खींचने लगा।
मां ने अपने बच्चे को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। उसने पानी में कूदने की कोशिश की, पत्थर और जो भी सामान उसके हाथ लगा, उससे मगरमच्छ पर हमला करने का प्रयास किया। मां की दिल दहला देने वाली चीखें पूरे इलाके में गूंजने लगीं। वह लगातार रोती-बिलखती रही और मदद के लिए गुहार लगाती रही, लेकिन प्रकृति के उस खूंखार शिकारी के सामने एक लाचार मां की ममता बेबस साबित हुई। कुछ ही सेकंडों में मगरमच्छ बच्चे को लेकर गहरे पानी में गायब हो गया।
ग्रामीणों का भारी हुजूम और प्रशासन की सतर्कता मां की दर्दनाक चीखें सुनकर आसपास के खेतों और घरों से लोग दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे। जब ग्रामीणों को घटना का पता चला, तो वहां हड़कंप मच गया। तुरंत पुलिस और वन विभाग को इस हादसे की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस बल और वन विभाग की रेस्क्यू टीम गोताखोरों के साथ घटना स्थल पर पहुंची।
नदी के विशाल क्षेत्र और गहरे पानी के कारण बचाव कार्य में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गोताखोर और स्थानीय मछुआरे नावों की मदद से बच्चे की तलाश में जुटे हुए हैं। जाल बिछाकर और आधुनिक उपकरणों का सहारा लेकर नदी के हर कोने को खंगाला जा रहा है, लेकिन अभी तक बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल सका है। घटना स्थल पर सैकड़ों ग्रामीणों का जमावड़ा लगा हुआ है और माहौल बेहद तनावपूर्ण एवं दुखद बना हुआ है।
अक्सर सामने आते हैं मगरमच्छों के हमले के मामले यह कोई पहली घटना नहीं है जब नदी किनारे रहने वाले ग्रामीण इस तरह के जंगली जानवरों या मगरमच्छों के शिकार बने हों। मानसून के मौसम में या नदियों का जलस्तर बढ़ने पर मगरमच्छ अक्सर रिहाइशी इलाकों और तटों के करीब आ जाते हैं। भोजन की तलाश में ये जीव किनारे पर आने वाले मवेशियों और इंसानों को अपना शिकार बनाने की घात में रहते हैं।
स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने कई बार चेतावनी जारी की है कि लोग नदियों और जलाशयों के बेहद करीब न जाएं, विशेषकर छोटे बच्चों और मवेशियों को पानी के किनारे अकेला न छोड़ें। हालांकि, दैनिक आवश्यकताओं और उचित सुरक्षा घेरा न होने के कारण ग्रामीण अक्सर मजबूरी में नदी किनारे जाने को विवश होते हैं।
सुरक्षा और सतर्कता की सख्त जरूरत इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर से सुरक्षा व्यवस्था और जन-जगरूकता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे संवेदनशील नदी घाटों पर पक्के सुरक्षा घेरे (कटीले तार या जाली) का निर्माण कराए ताकि कोई भी बच्चा या व्यक्ति अनजाने में गहरे पानी या खतरों के करीब न जा सके। इसके अलावा, तटवर्ती इलाकों में चेतावनी बोर्ड लगाए जाने चाहिए और गश्त बढ़ाई जानी चाहिए।
ग्रामीणों से भी अपील की जाती है कि वे नदी किनारे जाते समय अत्यधिक सतर्कता बरतें। पानी के पास अकेले जाने से बचें और अपने बच्चों को जलाशयों से दूर रखें। जब तक नदी में मगरमच्छों की मौजूदगी की आशंका बनी हुई है, तब तक किनारे पर किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। फिलहाल, पूरा गांव पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और हर कोई ईश्वर से उस मासूम के लिए प्रार्थना कर रहा है।
यह भी पढ़ें: विश्व एथलेटिक्स U20 चैंपियनशिप: भारत का अभियान 3 पदकों के साथ समाप्त